सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश ड्रेनेज खंड द्वितीय पर ही 19.2 किमी लंबे करमैनी-बेलौली तटबंध के सुरक्षा की जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी ने 15 जून तक बाढ़ से बचाव का काम पूरा लेने का निर्देश दिया था, लेकिन तटबंध पर खतरे वाली जगहों पर अभी तक न तो रेनकट्स भरे गए हैं और ना ही रैटहोल। 1998 में बाढ़ की विभीषिका झेल चुके कछारवासियों ने मरम्मत कार्य को शासन से सही ढंग से कराने की मांग की।
बेलौली निवासी मधुसूदन त्रिपाठी, उमेश, शरद त्रिपाठी, श्रवण कुमार, मार्कण्डेय तिवारी और हरिकेश तिवारी आदि ने कहा कि अबकी बार तो बंधे पर बाढ़ चौकिया भी स्थापित नहीं हुई। दो-एक हफ्ते में एकाध बार विभागीय अभियंता तटबंध पर पहुंचकर बंधे का अनुरक्षण करके चले जाते हैं। तटबंध पर ही चाय की दुकान चलाने वाले विजय जायसवाल ने कहा कि महज औपचारिकता का काम हो रहा है। बेलौली में बने एक रेगुलेटर को रंगाई पुताई करवाकर तटबंध की सुरक्षा नहीं हो सकती है। इन लोगों ने कहा कि नदी का मुड़ाव बेहद खतरनाक खैरा मोड़ पर तटबंध की तरफ है। इस जगह तटबंध की सुरक्षा के लिए बने ठोकर उचित जगहों पर नहीं बने हैं। घूरापाली प्रधान प्रतिनिधि अनिल निषाद और छपिया अगंद निवासी अजय तिवारी ने कहा कि बढ़यां, बेलौली में बना रिंगबांध, खैरा, नौगों, जोरवां में नदी का मुड़ाव बंधे की तरफ है। यहां पर बचाव का कोई ठोस उपाय नहीं किया गया। कछारवासियों ने बताया कि इस तरह तटबंध की सुरक्षा के लिए कोई भी ठोस उपाय नहीं किया गया है। कुसौनां कलां निवासी अनिल तिवारी ने कहा बंधे पर पानी का दबाव कम करने में कछारवासियों की सलाह को अनसुना कर दिया जाता है। लोगों ने शासन से बाढ़ की विभीषिका से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाई, इससे आगामी बरसात के दिनों में वह चैन की नीद सो सकें। इस बावत पूछे जाने पर ड्रेनेज खंड द्वितीय के सहायक अभियंता दिनेश मोहन ने बताया कि तटबंध की सुरक्षा के लिए छह अवर अभियंता करमैनी की तरफ से क्रमश: रामजनक, वीरेंद्र, मनोज, महेंद्र प्रताप, जय हिंद व रामखेलावन की तैनाती है। शासन की तरफ से मिलने वाली धनराशि से तटबंध की सुरक्षा का प्रयास जारी है।