न तो खून की जांच हो रही, न एक्सरे की है सुविधा
सुविधाओं के अभाव में रेफर सेंटर बना सीएचसी नाथनगर
मरहम पट्टी कर 16 किमी दूर सदर अस्पताल कर दिया जाता है रेफर
धनघटा(संतकबीरनगर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नाथनगर में न तो खून जांच हो रही है और न ही एक्सरे हो रहा है। मरीजों को निजी पैथोलॉजी में जांच कराना पड़ता है। सड़क हादसे व अन्य घटनाओं में पीड़ितों को मरहम पट्टी कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में गंभीर मरीजों को 16 किमी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
जून और जुलाई में अब तक 165 से अधिक घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया जा चुका है। क्षेत्र की करीब दो लाख 31 हजार 515 की आबादी सीएचसी नाथनगर पर निर्भर है। मानक के अनुसार किसी भी सीएचसी में सात डॉक्टर होने चाहिए। वर्तमान में सीएचसी में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश चौधरी, डॉ. वाईपी सिंह और डॉ. केपी वर्मा की तैनाती है।
यहां फिजिशियन, सर्जन, हड्डी, स्त्री व बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्र चिकित्सक आदि कई वर्षों से नहीं हैं। नसबंदी के अलावा कोई अन्य ऑपरेशन भी नहीं हो पाता। सीएससी में 30 बेड का वार्ड भी है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण मरीज कम ही भर्ती होते हैं।
सीएचसी में वार्ड ब्वाय की तैनाती नहीं है। एक्स-रे टेक्नीशियन की तैनाती कर दी गई है, लेकिन मशीन न होने के कारण एक्स-रे नहीं हो पाता है। शुगर की जांच छोड़कर अन्य जांच के लिए लोगों को पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता है।
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कोट
विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। जांच के लिए लगीं मशीनें पुरानी हो चुकी हैं। एक माह के अंदर अत्याधुनिक लैब शुरू हो जाएगा।
-डॉ. राजेश चौधरी, अधीक्षक, सीएचसी नाथनगर