- परिजनों का आरोप, समय से बेटी पहुंचती अस्पताल तो बच सकती थी जान
- घर की इकलौती कमाऊ सदस्य की मौत से गमगीन थे परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। हादसे में घायल होने के बाद रोडवेज बस की परिचालक नेहा यादव ने फोन पर भाई और पिता से बातचीत कर घटना की जानकारी दी थी। परिजनों का कहना है कि समय से बेटी को अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
गोरखपुर जिले के राजघाट क्षेत्र के खुरर्मपुर की रहने वाली 28 वर्षीय नेहा यादव पुत्री रतीश मोहन यादव वर्ष 2016 में रोडवेज में नियमित परिचालक पद पर भर्ती हुई थीं। राप्ती नगर डिपो में उनकी तैनाती थी। वह दो भाई और दो बहनों में सबसे बड़ी थीं। परिवार में मात्र इकलौती कमाऊ सदस्य थी। पोस्टमार्टम हाउस आए भाई ऋतुवेंद्र मोहन यादव ने बताया कि नेहा बड़ी बहन थी। दूसरे नंबर पर वह और तीसरे नंबर पर भाई ऋषिवेंद्र मोहन यादव और छोटी बहन हैं।
शुक्रवार की सुबह बहन नेहा ड्यूटी के लिए घर से निकली थी। दिन में तीन बजे बहन ने फोन कर परिवार के सदस्यों से बातचीत की थी। लखनऊ से बस चालक विक्रम प्रसाद के साथ यात्रियों को लेकर गोरखपुर लौट रही थी। कोतवाली क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग पर रैना पेपर मिल के पास हादसा हो गया। हादसे की जो वजह पता चला , उसके मुताबिक रोडवेज बस के चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस के आगे चल रही ट्रक से टकरा गई।
हादसा करीब रात सवा दो से तीन बजे के बीच का था। हादसे में घायल होने के तुरंत बाद बहन नेहा ने फोन कर भाई ऋतुवेंद्र मोहन यादव और पिता से बातचीत की। इधर घायल बहन को डायल 100 नंबर की गाड़ी ने रास्ते में गुजरे एबुलेंस में बैठा कर अस्पताल भेजवाया, लेकिन बहन को खलीलाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में भेज दिया गया, जहां डॉक्टर ने रेफर कर दिया। प्राइवेट अस्पताल के पास एबुलेंस तो था, लेकिन चालक की व्यवस्था नहीं थी।
पीड़ित भाई और पिता गोरखपुर से सफर करके प्राइवेट अस्पताल पहुंचे और 108 नंबर की एबुलेंस से भोर में सवा चार बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे,जहां से डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। अभी लोग गोरखपुर ले जाने की तैयारी करते कि उसी बीच परिचालक नेहा यादव की मौत हो गई।
कोतवाल सर्वेश राय ने बताया कि हादसे की सूचना के दस मिनट के भीतर मगहर चौकी इंचार्ज रजनीश राय पहुंच गए थे। उसके तुरंत बाद वह भी पहुंच गए। महिला परिचालक को ढूंढा गया,लेकिन पता चला कि वह खुद प्राइवेट अस्पताल के लिए एबुलेंस से निकल गई थी। शेष घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसमें किसी स्तर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। इस में बस चालक विक्रम प्रसाद की तहरीर पर अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। राप्ती नगर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने बताया कि परिचालक नेहा यादव की मौत ड्यूटी के दौरान हुई है। ड्यूटी के दौरान मौत होने पर 7.50 लाख रुपये और बीमा का दस लाख रुपये पीड़ित परिजनों को दिलाया जाएगा। पीड़ित परिवार का कोई सदस्य नौकरी की मांग करेगा तो उसे नौकरी भी दिलाई जाएगी।
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एआरएम की जांच में चालक की मिली लापरवाही
राप्ती नगर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने बताया कि घटना की सूचना पर घटना स्थल और अस्पताल पहुंच कर जानकारी जुटाई गई। संविदा चालक विक्रम से भी पूछताछ की गई। चालक ने बताया कि वह बस को चला रहा था। आगे- आगे ट्रक जा रही थी। अचानक ट्रक चालक की गति थमी तो बस चालक ने ब्रेक लिया। जिससे चालक नियंत्रण खो बैठा और सड़क किनारे खडे ट्रक में बस टकरा गई। चालक को नियमानुसार कम से कम 25 मीटर की दूरी बनाए रखनी चाहिए थी,लेकिन चालक ने ऐसा नहीं किया। जांच में चालक की लापरवाही सामने आई है। इसमें उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नेशनल हाइवे स्थित रैना पेपर मिल सड़क हादसे में घायल को अस्पताल ले जाते पुलिसकर्मी।संवाद