हरिहरपुर। देवरिया गंगा में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के दूसरे दिन हनुमानगढ़ी अयोध्या धाम से पधारे कथाव्यास अमित दास महराज ने श्रीराम की बाल-लीला का वर्णन सुनाया।
उन्होंने कहा कि भगवान राम बाल स्वरूप में बहुत सुंदर दिख रहे हैं। स्वर्ग से देवता अपना रूप बदल कर रोज भगवान राम का दर्शन करने आते हैं। उन्होंने कहा कि एकबार कागभुसुंडी जी कौवे का रूप धारण कर प्रभु श्रीराम के हाथों से रोटियां छीनकर खाने लगते हैं। जब कागभुसुंडी ने भगवान राम के हाथ से रोटी छीनी तब भगवान जोर-जोर से रोने लगे। रोटी के लिए भगवान का रोना सुनकर कागभुसुंडी जी को संदेह होता है कि जगत के पालनहार रोटी के टुकड़े के लिए रो रहे हैं। वे वहां से उड़कर जाने लगते हैं। संवाद