धनघटा। सरसों, मटर, चना, वरसीम की बुवाई की समय डीएपी किसानों की पहुंच से दूर हो गई है। साधन सहकारी समितियाें पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। वहीं, बगैर नैनो यूरिया लिए निजी दुकानदार किसानों को डीएपी नहीं दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय नैनो यूरिया की कोई जरूरत नहीं है। यूरिया लेने से डीएपी खाद की कीमत बढ़ जा रही है।
सरकार मोटे अनाज की खेती करके जैविक खाद के प्रयोग पर भले ही जोर दे रही है, लेकिन बगैर रासायनिक खाद के ठीकठाक पैदावार की बात किसानों के गले के नीचे नहीं उतर रही है। किसानों का कहना है कि बगैर डीएपी के मटर, चना, सरसों आदि की पैदावार अच्छी नहीं होगी। कुछ न कुछ तो डीएपी डालनी जरूरी है। लेकिन किसी भी साधन सहकारी समिति पर इस समय डीएपी उपलब्ध नहीं है। निजी दुकानदारों के पास जाना मजबूरी है।
किसान रामबरन, सुखदेव, राममिलन, रंजीत, रामदयाल, राम सुमेर आदि का कहना है कि प्राइवेट दुकानदारों के पास डीएपी खाद तो है लेकिन वह उसके साथ नैनो यूरिया ले जाने के लिए विवश कर रहे हैं। एक बोरी डीएपी खाद की कीमत 1360 रुपया है। उसके साथ आधा किलो नैनो यूरिया लेने पर 225 रुपये और ले रहे हैं। कुल मिलाकर एक बोरी डीएपी की कीमत 1585 रुपये पड़ रही है। किसानों का कहना है कि डीएपी की किल्लत से फसल की बुवाई प्रभावित हो रही है। इस संबंध में निजी दुकानदारों का कहना है कि बगैर नैनो यूरिया लिए डीपीएफ डीएपी दे ही नहीं रहा है। इसके कारण डीएपी ले आना और उसे किसानों में बेचना मजबूरी हो गई है।