नमामि गंगे योजना में शामिल होगी आमी
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संतकबीरनगर। संत कबीर से जुड़ी होने के कारण कबीरपंथियों के लिए गंगा के समान पवित्र आमी नदी को प्रदूषण मुक्त कराकर फिर निर्मल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने नए सिरे से कवायद शुरू की है। लोक आस्था से जुड़ी इस नदी के पुनरुद्घार के लिए प्रशासन ने केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना में इसे शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है। अगर प्रस्ताव मंजूर हुआ तो सफाई व जल प्रवाह बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिल जाएगा। ऐसा संभव हुआ तो लाखों लोगों की आस्था से जुड़ी यह नदी फिर पहले जैसी बन सकती है।
सिद्घार्थनगर जिले के सिकोहरा ताल से निकली आमी नदी की कुल लंबाई 136 किलोमीटर है। इसमें से 70 किलोमीटर हिस्सा संतकबीरनगर जिले में आता है। नदी के दोनों तरफ 100 से अधिक गांव बसे हैं। महज तीन दशक पहले तक इस नदी के मीठे जल का उपयोग अगल-बगल के गांवों के लोग पीने व अन्य पूजा के अलावा खेत की सिंचाई के लिए करते थे, लेकिन उद्योगों के रसायन युक्त पानी व शहरों के गंदे नालों के पानी ने इस नदी के निर्मल जल को मटमैला बना दिया। इधर बारिश कम होने का असर यह हुआ कि नदी में पानी कम होता चला गया। इस वर्ष तो बरसात खत्म होते ही नदी पतले नाले में सिमट गई। नदी का बहाव धीमा होने से इसमें गंदगी बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने इसके पुनरुद्घार की योजना बनाते हुए केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है। इसके तहत नदी में जलप्रवाह बनाए रखने एवं प्रदूषण समाप्त करने के लिए औद्योगिक इकाइयों व शहरी क्षेत्र के सीवरेज के पानी के शोधन के लिए संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है।