फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: बंदरों का आतंक, जनजीवन प्रभावित, नहीं हो रहा समाधान

विज्ञापन
धर्मसिंहवा में आपाधापी करते बंदर
विज्ञापन
धर्मसिंहवा। नगर पंचायत धर्मसिंहवा के कई वार्डों में बंदरों के आतंक से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। बंदरों के डर से लोग असहज बने हैं। स्थिति यह है कि कुछ बंदर ट्रैक्टर चालकों पर हमला करने से भी नहीं चूक रहे हैं। वहीं, नगर क्षेत्र के बाजार में बंदरों का उत्पात दुकानदारों और ग्राहकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। लगातार बढ़ रही इस समस्या के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोगों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्रभावी कदम कौन उठाएगा।
विज्ञापन


कुछ महीनों से नगर पंचायत क्षेत्र में बंदरों के उत्पात से समस्या उत्पन्न हो रही है। दुकानों पर आने वाले दुकानदार और ग्राहक इनके आतंक से परेशान हैं। बंदरों के डर से बाजार में लोगों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
दुकानदारों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व वार्ड छिबरा में एक ट्रैक्टर चालक पर बंदरों ने हमला कर दिया। घबराकर चालक चलता हुआ ट्रैक्टर छोड़कर भाग गया। इस तरह की घटनाओं से लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। व्यापारियों का कहना है कि नगर पंचायत क्षेत्र से बंदरों को पकड़वाने की जरूरत है। शासन की ओर से इस कार्य के लिए जिस भी विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे आगे आकर समस्या का समाधान करना चाहिए, ताकि आम लोगों और व्यापारियों को राहत मिल सके।
विज्ञापन

-
नगर क्षेत्र में बंदरों का आतंक है। दुकान के सामने आकर बैठ जा रहे हैं, जिससे ग्राहक दुकान में आने से कतरा रहे हैं। इससे दुकानदारी प्रभावित हो रही है।
-गोपाल अग्रहरि, व्यापारी

बंदरों को पकड़वाने की मांग लगातार नगर पंचायत से की जा रही है। सड़क पर निकलना किसी खतरे से खाली नहीं है। इन बंदरों का स्थायी निदान होना चाहिए। जिससे लोगों की समस्या दूर हो सके।
-सोनू प्रजापति, निवासी धर्मसिंहवा

कभी-कभी यह बंदर दुकान के अंदर आ जाते हैं। किसी तरह से उन्हें हटाया जाता है। घरों में कपड़े आदि फाड़ दे रहे हैं। अगर कोई इन्हें भगाने की कोशिश करता है तो उसे काटने के लिए दौड़ा लेते हैं।
-शिव वर्मा, व्यापारी

-
एक बंदर तो बाइक पर आकर बैठ गया। बाइक में लगे साइड शीशे को देखने लगा। भगाने पर भी नहीं भागा, काफी देर बाद वह गया तो बाइक के पास गए। इस तरह के बंदरों को पकड़वाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

-मनीष अग्रहरि, धर्मसिंहवा
-
जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे

बंदरों की समस्या के समाधान के लिए नगर पंचायत प्रशासन और वन विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे हैं। नगर पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि शासनादेश के अनुसार बंदरों से संबंधित मामलों में प्राथमिक जिम्मेदारी वन विभाग के कर्मचारियों की है, जबकि नगर पंचायत सहयोगी की भूमिका निभाएगा। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासनादेश के तहत नगर निकाय क्षेत्र में बंदरों की समस्या के निस्तारण की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है और वन विभाग सहयोगी के रूप में कार्य करता है। इसी तरह ग्राम पंचायतों में समस्या के समाधान के लिए ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों को पहल करनी होती है।
-
आमजन को समाधान का इंतजार
जिम्मेदारी को लेकर दोनों विभागों के अलग-अलग तर्कों के बीच आम लोगों की परेशानी बरकरार है। लोगों का कहना है कि विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके। नगर पंचायत प्रशासन और वन विभाग को आपसी समन्वय बनाकर बंदरों को पकड़वाने तथा लोगों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
विज्ञापन



बोर्ड की बैठक में सभासदों द्वारा बंदरों की समस्या को उठाया गया था। इस पर कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही लोगों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाई जाएगी।
-आशुतोष ओझा, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत धर्मसिंहवा


नगर पंचायत प्रशासन को बंदरों को पकड़वाने में वन विभाग की आवश्यकता होगी तो वन विभाग के कर्मचारी सहयोग के लिए पहुंचेंगे। इसके लिए पहल करनी होगी।

-अजय त्रिपाठी, वन रेंजर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें