धनघटा। समय पर मजदूरी मिलने के उम्मीद पर काम करने वाले मनरेगा मजदूरों के खाते में तीन माह से मजदूरी की रकम नहीं आई। अब जब होली का त्योहार सामने है तो जेब खाली रहने की चिंता सताने लगी है। मजदूरों का कहना है कि अपने समय पर जब मजदूरी नहीं मिलेगी तो ऐसा काम करने से क्या फायदा।
72 ग्राम पंचायतों वाले विकास खंड हैंसर बाजार में 300 से अधिक सक्रिय जाॅब कार्ड धारक हैं। जो ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में मजदूरी करने का काम करते हैं। मजदूरों का कहना है कि 237 रुपए पर काम करने के बाद भी तीन-तीन महीने तक मजदूरी खाता में नहीं आ रही है। अब तक तो उम्मीद थी कि होली आते-आते मजदूरी की रकम खाते में आ जाएगी, लेकिन अब तक मजदूरी की रकम खाते में नहीं पहुंची।
जॉब कार्ड धारक राजाराम, रामसूरत, राम मूरत, लाल धर, रामनयन, सुमित्रा, खुशबू, पानमती, छोटेलाल, रामधनी, रघुवर आदि का कहना है कि दिसंबर महीने में जब ठंड के कारण लोग अपने घरों से निकलना नहीं चाह रहे थे तो उस समय सिवान में जाकर मनरेगा मजदूर फावड़ा चलाते थे। उम्मीद थी कि 10 से 15 दिनों के अंदर मजदूरी की रकम खाता में आ जाएगी।
लेकिन तीन महीने से अधिक का समय व्यतीत होने को है अभी तक मनरेगा की मजदूरी बैंक खाते में नहीं पहुंची। होली का त्योहार कैसे मनाया जाए यह बात समझ में नहीं आ रही है। जॉब कार्ड धारकों का कहना है कि मजदूरी की भुगतान की यही प्रक्रिया रही तो मनरेगा का काम करना बंद कर देना पड़ेगा।