बखिरा में बना पंचायत भवन बदहाल है।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
शासन द्वारा पंचायती राज व्यवस्था के तहत गांव में ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मुहैया कराने के लिए मिनी सचिवालय बनाने का निर्देश सालों पहले दिया गया था, किंतु क्षेत्र के दर्जनों ग्राम पंचायतों में मिनीसचिवालय के लिए निर्मित भवन धूल फांक रहे है। पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही से शासन की मिनी सचिवालय की महत्वाकांक्षी योजना विफल साबित हो रही है।
रामलगन, रामनरेश, राजेश गुप्त, विनय, दुर्गेश, मोहित, प्रेमशंकर, सीताराम, देवीलाल, रामशंकर ने कहा कि बखिरा में बना पंचायत भवन बदहाल है। इसमें बने कमरे, दरवाजे, शौचालय देखरेख के अभाव में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है। लोगों ने कहा कि ग्राम पंचायत को मिनी सचिवालय में तब्दील करने के लिए कुछ अन्य कमरों का भी निर्माण कराया गया, किंतु इन कमरों को स्टोर रूम व किराए के कमरों के बतौर उपयोग किया जा रहा है। इसके जर्जर कमरों में लगे दरवाजे टूट है। कुत्ते, सुअरों समेत अन्य जानवरों का जमावड़ा हमेशा बना रहता है। जुआरियों और गजेड़ियों का अड्डा बना यह पंचायत भवन अपने उद्देश्य में विफल है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से गांव में कभी भी खुली बैठक नहीं की गई। लोगों का कहना है कि मिनीसचिवालय की व्यवस्था बहाल होने से आमजन की दर्जनों समस्याएं स्थानीय स्तर पर ही हल हो जाने से काफी सहूलियत होती। मिनीसचिवालय पर ग्राम विकास अधिकारी की मौजूदगी से लोगों को सरकार द्वारा दी जाने वाली योजनाओं की जानकारी मिलती रहती, किंतु मनमानी व अनदेखी से इस ग्राम पंचायत में विकास संबंधी सभी कार्य रुके पड़े है। इसका खामियाजा कस्बे के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इस बाबत प्रभारी बीडीओ रमेश चंद्रा ने बताया कि मिनी सचिवालय की बदहाल स्थिति की जांच कराई जाएगी।