संतकबीरनगर। कामकाज के तनाव के बीच इन दिनों भीषण गर्मी व नींद की कमी लोगों को माइग्रेन का शिकार बना रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में 12 से 15 मरीज पहुंच कर उपचार करा रहे हैं। चिकित्सक भी तनाव न लेने की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल के मनो चिकित्सक डॉ. तन्वांगी मणि शुक्ल ने बताया कि अधिक तापमान लोगों की सेहत पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालता है। धूप व गर्मी से लोग कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। आजकल समाज में चकाचौंध और काम का दबाव है। उससे लोग तनाव का शिकार हो रहे हैं। भीषण गर्मी में यह तनाव लोगों का माइग्रेन का शिकार बना रहा है।
नींद पूरी न होना भी एक वजह है। उन्होंने बताया कि माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारणों के अतिरिक्त शरीर में पानी की कमी होना प्रमुख कारण है। गर्मियों में शरीर में पसीना अधिक निकलता है। इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। इस कारण यह समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए शरीर में पानी की कमी न होने दें। उन्होंने बताया कि अस्पताल में माइग्रेन से संबंधित 12 से 15 मरीज प्रतिदिन आते है और उन्हें सलाह के साथ दवा दी जाती है।
माइग्रेन के लक्षण
माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इस बीमारी से सिर के एक हिस्से में तेज दर्द होता है। आमतौर पर यह परेशानी सिर के आधे हिस्से में रहता है। इस बीमारी से सिर में रह रहकर दर्द होता है। दर्द के साथ उल्टी, चिड़चिड़ापन महसूस होना, गुस्सा आना आदि भी लक्षण है।
बचाव के उपाय
गर्मी के मौसम में शरीर से पानी अधिक निकलता है। इसलिए शरीर में पानी की कमी न होने दें। पानी खूब पीयें। आदर्श जीवन शैली अपनाएं। रात को जल्दी सोएं, सुबह जल्दी उठें। सुबह शाम टहलने जाएं। व्यायाम करें। योग के साथ ही प्राणायाम करें। संतुलित आहार लें और तेज धूप में घर से बाहर न निकलें।