फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रिटिश मौलाना प्रकरण : नियमों की उड़ाता रहा धज्जियां, बेपरवाह रहे अधिकारी

Sun, 23 Nov 2025 02:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
विज्ञापन
मौलाना शमशुल हुदा खान की फाइल फोटो
विज्ञापन
संतकबीरनगर। दुधारा थानाक्षेत्र के देवरिया लाल गांव के मूल निवासी तथा कोतवाली खलीलाबाद के मीट मंडी मार्ग पर स्थित रजा मंजिल में रहने वाला ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान नियमों की धज्जियां उड़ाता रहा और अधिकारी बेपरवाह बने रहे। कानून से खेलना उसकी आदत में शुमार हो गया था और नेपथ्य में रहकर भी वह अपनी गतिविधियों को संचलित करता रहा।
विज्ञापन

मौलाना शमशुल हुदा खान के पास ब्रिटेन की नागरिकता है। वह 2007 में लेकर 2017 तक वहां रहा। ब्रिटेन में रहते हुए मौलाना ने इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए कई विदेश यात्राएं कीं। वह पाकिस्तान के कई इलाकों में जाकर वहां के मौलवियों और लोगों से संपर्क बनाता था। भारत लौटकर उसने अपने करीबियों के जरिए जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं और संदिग्ध व्यक्तियों से जुड़ा रहा। यूपी एटीएस का मानना है कि यह नेटवर्क इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का प्रयास था। वह इंग्लैंड और अन्य देशों से फंड इकट्ठा कर पूर्वांचल के मदरसों तक भेजता था। इसके लिए उसे कमीशन भी मिलता था। ब्रिटिश नागरिकता होने के बाद भी वह अपने बैंक खातों का संचालन करता रहा। एसआईटी ने उसके 18 बैंक खातों के 94 लाख रुपयों को अब तक फ्रीज करा दिया है। वहीं उसके विदेशी फंडिंग के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जा रही है। उसके द्वारा खलीलाबाद में कुलियातुल बनातिर रजबिया नाम से एक गर्ल्स मदरसा भी चलाया जा रहा था। जब वर्ष 2024 में उस मदरसे को सील कर दिया तो उसने उसी मदरसे की बाउंड्री से सटे उसी नाम से दूसरा मदरसा चलाना शुरु कर दिया। यही नहीं एक मकान में वह गर्ल्स हास्टल भी चलाता था। इसमें जिले के साथ ही अन्य जनपदों और प्रांतों की लड़कियों को रखा जाता था। 3 नवंबर को उसके दूसरे मदरसे को भी सील कर दिया गया। इसके बाद अन्य जिलों के लोग हाॅस्टल से अपनी लड़कियों को लेकर अपने घर चले गए। वर्तमान में एसआईटी इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।
-
मौलाना को 2013 में मिल गई ब्रिटिश नागरिकता
मौलाना शमसुल हुदा खान 12 जुलाई 1984 को आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त हुआ था। 2007 में वह ब्रिटेन चला गया और 2017 तक वहां रहा। 2013 को उसे ब्रिटिश नागरिकता मिल गई। वह मदरसे में बगैर पढ़ाए हर साल वेतन लेता रहा। आरोप है कि उसने सरकारी कोष से 16 लाख से ज्यादा रुपये सैलरी अवैध रूप से ले ली। 2017 में उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देकर पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई।
विज्ञापन


-

2007 से संदिग्ध थीं गतिविधियां

एटीएस को जांच में पता चला कि शमशुल हुदा खान मदरसा में नौकरी के दौरान बार-बार विदेश यात्राएं करता रहा। मौलाना की गतिविधियां 2007 से ही संदिग्ध थीं। वह ब्रिटेन में रहते हुए भी भारत में अपने नेटवर्क को सक्रिय रखे हुए था। यही नहीं उसका पाकिस्तान भी आना जाना लगा रहा। वह प्रतिबंधित संगठन दावते इस्लाम भी चलाता था।
-
मौलाना पर दर्ज हैं कुल तीन केस
मौलाना के खिलाफ संतकबीरनगर और आजमगढ़ में पहले से दो अन्य अभियोग दर्ज हैं, जिनमें आरोप-पत्र कोर्ट में दाखिल किया जा चुका है। इनमें भी विदेशी फंडिंग और संदिग्ध संपर्कों के आरोप प्रमुख हैं। वहीं कोतवाली खलीलाबाद में 2 नवंबर को धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा अधिनियम का दुरुपयोग तथा अन्य मामलों में केस दर्ज किया गया है।

मौलाना शमशुल हुदा खान की फाइल फोटो

मौलाना शमशुल हुदा खान की फाइल फोटो

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें