गोरखपुर जनपद के बासगांव थाना क्षेत्र के बघेला गांव निवासी रामनरायन पुत्र हरीलाल का आरोप है कि उसकी बेटी सुशीला की शादी महुली क्षेत्र के हरैया गांव निवासी रमेश के बेटे इंद्रेश के साथ सात जून 2012 को हुई थी। शादी में मांग के अनुसार बीस हजार रुपये नकद व लड़के को एक अंगूठी दहेज में दिया था। दहेज में सोने की चेन व रंगीन टेलीविजन की मांग पूरी नहीं कर पाया था।
शादी में ही बेटी की विदाई हो गई। दो माह बाद उसकी बेटी ससुराल से विदा होकर जब मायके आई, तभी से वह अपनी मां और चाचा के साथ पिता से दहेज के लिए ससुरालियों के जरिए प्रताड़ित करने की शिकायत करती रही। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बेटी के ससुरालियों की मांग पूरी नहीं कर सका। उसकी बेटी सुशीला को सात माह पूर्व एक पुत्र भी पैदा हो गया।
तो ऐसा लगा कि अब उसके ससुराली उसके साथ बुरा बर्ताव नहीं करेगे।28 नवंबर 2015 को उसकी लड़की अपने पुत्र के साथ उसके घर आई और कही की उसके पति, ससुर व सास यह कह कर घर से निकाल दिये है कि जाकर अपने मायके से चेन व टेलीविजन लेकर आओ नही तो वही रहो। तब अगले दिन उसके भाई रतनाकर बेटी के ससुराल जाकर बेटी के पति और ससुर से बातचीत किए।
काफी मान मनौवल के बाद 30 नवंबर को बेटी ससुराल गई, लेकिन चार दिसंबर 2015 को उनकी बेटी टेलीफोन से सूचना दी कि उसके ससुराली उसे मार पीट कर धोखे से जहर दे दिए है। ऐसी सूचना पर उसके भाई रमेश, नीतेश, गांव के नीरज व चंद्रशेखर के साथ उसके ससुराल गए, तो उसे पहले नाथनगर फिर सदर अस्पताल खलीलाबाद ले गए। जहां डॉक्टर ने बेटी को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया,लेकिन कार्रवाई नहीं की। पीड़ित पिता मुंबई से घर आया और फिर डीआईजी को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। डीआईजी के निर्देश पर महुली पुलिस ने ससुरालियों के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज किया।