संतकबीरनगर। पासपोर्ट सेल में तैनात रहे आरोपी दरोगा और एलआईयू के मुख्य आरक्षी के जरिए पासपोर्ट सत्यापन में की गई अनियमितता की पोल परत-दर परत खुलती ही जा रही है। तथ्य छुपा कर फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने वाले भी अब कार्रवाई की जद में आने लगे हैं। खबर है कि फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाकर कई लोग बैंकाक और सउदी अरब पहुंच चुके हैं। बैंकाक घूमने के शौक के चलते ही गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ने फर्जी पते पर पासपोर्ट बनवाया था, जिसे अब जेल की हवा खानी पड़ गई।
एसपी सत्यजीत गुप्ता ने पासपोर्ट सत्यापन में गड़बडी की शिकायत पर सीओ सदर अंशुमान मिश्रा से जांच कराई थी। सीओ की जांच में पाया गया कि वर्ष 2021-22 में कुल 101 पासपोर्ट के सत्यापन में हेराफेरी की गई। थानों से जिन आवेदनों की संस्तुति नहीं की जाती थी, उन्हें पासपोर्ट सेल में तैनात दरोगा कामेश्वर मिश्रा और एलआईयू के मुख्य आरक्षी मनोज पटेल जनपदीय आईडी पासवर्ड से संस्तुति करके भेज देते रहे। इसमें बाहरी व्यक्ति व बिधियानी निवासी वीरेंद्र यादव से वे सहयोग लेते थे। इसके बदले में रकम ली जाती थी। इधर जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। अंतिम सत्यापन पासपोर्ट मुख्यालय लखनऊ से किया जाता है, लेकिन गलत ढंग से आईडी-पासवर्ड के जरिए उसे जिले स्तर से ही कर दिया जाता था।
जिन 101 पासपोर्ट में हेराफेरी की गई है, उनमें से 70 प्रतिशत पासपोर्ट कोतवाली क्षेत्र के हैं। इसके अलावा दुधारा, महुली और धनघटा क्षेत्र का गलत पता दर्शा कर लोगों ने पासपोर्ट का सत्यापन कराया है। छह ऐसे लोगों का पासपोर्ट सत्यापन हुआ है, जिनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं। गलत ढंग से सत्यापन कराकर पासपोर्ट बनवाने वाले कई लोग दुबई और सऊदी अरब चले गए हैं। इसकी पुष्टि भी शुक्रवार को पुलिस के जरिए की गई दो आरोपियों की गिरफ्तारी से हुई। पुलिस की पूछताछ में पकड़े गए गए दुधारा क्षेत्र के जातेडीहा गांव निवासी आरोपी अब्दुल सलाम ने बताया कि उसका पासपोर्ट पूर्व में बना था। उसका इस्तेमाल करके वह दुबई भी गया था। वर्ष 2018 में वह जुआ खेलते पकड़ा गया था।
इस वजह से उसका पासपोर्ट नहीं बन पा रहा था। उसने दरियाबाद के रहने वाले दुकानदार महापाल की मदद ली और उसे 5,000 रुपये दिए तो पासपोर्ट बन गया। गोरखपुर जिले के गोला क्षेत्र के सकरदेइया निवासी व गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अरविंद यादव उर्फ अमन यादव ने बताया कि वह वर्तमान में अर्थशास्त्र से पीएचडी कर रहा है। उसे घूमने के लिए बैंकाक जाना था। छात्र राजनीति के दौरान कैंट थाने में मुकदमा दर्ज होने से गोरखपुर से पासपोर्ट नहीं बन पा रहा था। उसी वजह से खलीलाबाद के बिधियानी निवासी वीरेंद्र यादव से संपर्क किया और उसने 22,000 रुपये लेकर फर्जी आधार कार्ड के सहारे खलीलाबाद का पता दर्शाकर पासपोर्ट जारी करा दिया। बैंकाक घूमने के शौक में उसे जेल जाना पड़ गया। संवाद
एक माह बाद भी नहीं पकड़ा गया आरोपी दरोगा
फर्जी तरीके से पासपोर्ट सत्यापन में फंसे दरोगा कामेश्वर मिश्रा की गिरफ्तारी पुलिस एक महीने बाद भी नहीं कर पाई है। दूसरी ओर, दावा किया जा रहा है कि एसपी की तीन टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए लगाई गई हैं। आलम यह है कि पुलिस उसे पकड़ना तो दूर, उसका लोकेशन तक ढूंढ पाई है। पुलिस का कहना है कि दरोगा ने खुद के मोबाइल फोन को बंद कर दिया है। एसपी ने बताया कि आरोपी दरोगा के खिलाफ 82 सीआरपीसी के तहत नोटिस चस्पा करा दिया गया है। यदि वह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ और पुलिस के जरिए पकड़ा नहीं गया तो कोर्ट से अनुमति लेकर उसके घर की कुर्की कराई जाएगी।
जांच में 101 पासपोर्ट के सत्यापन में हेराफेरी पाई गई थी। जांच में यह भी तथ्य सामने आया है कि पासपोर्ट मुख्यालय लखनऊ जो अंतिम सत्यापन करता है, उसे जिले स्तर से ही गलत ढंग से आईडी पासवर्ड का इस्तेमाल करके कर दिया जाता था। पासपोर्ट मुख्यालय लखनऊ से यह जानकारी मांगी गई है कि 101 पासपोर्ट के आवेदनों में से कितने का पासपोर्ट बन चुका है और लोग विदेश में कहां- कहां गए हैं। इसकी जानकारी होते ही विदेश गए लोगों के पासपोर्ट रद्द कराए जाएंगे और उन्हें वापस बुलाया जाएगा। तथ्य छुपाकर फर्जी अभिलेखों के जरिए पासपोर्ट सत्यापन कराने अथवा बनवाने वाले लोगों को चिह्नित करके गिरफ्तारी शुरु करा दी गई है। जैसे-जैसे लोग प्रकाश में आते जाएंगे, वैसे-वेसे उन पर कार्रवाई होती जाएगी। - सत्यजीत गुप्ता, एसपी