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बिना टेंडर 50 लाख के कार्य कराने की होगी जांच

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बिना टेंडर 50 लाख के कार्य कराने की होगी जांच
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- सीडीओ ने तीन सदस्यीय टीम का किया गठन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। विकास खंड बेलहर कला में विधायक निधि से बिना टेंडर 50 लाख का कार्य कराकर भुगतान कराने की कोशिश के मामले की जांच होगी। इसके लिए सीडीओ ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। टीम से एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है।
वर्ष 2021-22 में पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल ने विकास खंड बेलहर कला क्षेत्र में विधायक निधि से करीब 50 लाख से कार्य कराए जाने के लिए दस प्रस्ताव दिया था। कार्यदाई संस्था विकास खंड बेलहर कला नामित हुई। ठेकेदारों ने बिना टेंडर और कार्यादेश जारी हुए ही कार्य करा दिया। इसी दौरान 29 सितंबर 2022 को विधायक अनिल त्रिपाठी ने सीडीओ को पत्र दिया। जिसमें जिक्र किया कि पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल के जरिए जो दस प्रस्ताव दिए गए थे, वे विधान सभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण टेंडर आदि प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने की वजह से कार्य कराए नहीं जा सकें।
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विधायक ने टेंडर आदि की प्रक्रिया पूर्ण कराते हुए उक्त प्रस्तावों पर कार्य कराए जाने की सहमति जताई। इधर कुछ ठेकेदारों ने कराए गए कार्य का भुगतान कराने की कोशिश शुरू की। भुगतान की मांग को लेकर डीएम से मुलाकात की। ठेकेदारों ने भुगतान नहीं होने का मामला सीएम दरबार तक पहुंचाया। विधायक के पत्र के बाद जब बिना टेंडर और कार्यादेश के कार्य कराए जाने की पोल खुली तो विकास खंड बेलहर से लेकर डीआरडीए तक हड़कंप मचा और भुगतान में अड़चन फंस गई।
अमर उजाला ने नौ नवंबर के अंक में बिना मंजूरी 50 लाख का कार्य करा भुगतान की कोशिश नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित किया। खबर का संज्ञान का लेकर सीडीओ अतुल मिश्र ने प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी। जांच टीम में डीडीओ, परियोजना निदेशक डीआरडीए और एई डीआरडीए को शामिल किया है। जांच टीम को एक सप्ताह के भीतर जांच कर रिपोर्ट दिए जाने का निर्देश दिया है।
पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल ने करीब 50 लाख का दस प्रस्ताव इंटरलॉकिंग कार्य के लिए दिया था। जिसकी स्वीकृति चार जनवरी को डीआरडीए से हुई थी। आठ जनवरी को शाम चार बजे टेंडर निकलना था, लेकिन ढाई बजे दिन में ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई थी। जिसकी वजह से टेंडर नहीं निकल पाया। वैसे कार्य प्रभारी की नियुक्ति किया गया था, लेकिन सप्लाई का ऑर्डर नहीं हुआ था। बिना टेंडर कैसे कार्य हुआ और उसकी एमबी कैसे हुई, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। प्रकरण की जांच होगी तो हकीकत सामने आ ही जाएगी।
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- विनोद मणि त्रिपाठी, पूर्व बीडीओ बेलहर
बिना टेंडर के 50 लाख के कार्य कराए जाने और एमबी होने का प्रकरण गंभीर है। प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। टीम को एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट दिए जाने का निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- अतुल मिश्र, सीडीओ
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