संतकबीरनगर। ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसे का नक्शा स्वीकृत कराने के लिए नवंबर 2018 में आवेदन किया गया था। नक्शा में प्रस्तावित भूखंड अधिक होने के कारण उसे सहयुक्त नियोजक संभागीय नियोजन खंड गोरखपुर को तकनीकी जांच के लिए भेजा गया था। प्रस्तावित भू-खंड 250 मीटर से अधिक होने के कारण वहां से 11 दिसंबर को नक्शा वापस कर दिया गया। मदरसा प्रबंधक को 6 प्रतियों में संशोधित मानचित्र 15 दिन के अंदर प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद मदरसा प्रबंधन ने नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र को संशोधित मानचित्र उपलब्ध नहीं कराया और मनमाने ढंग भव्य मदरसे का निर्माण करा लिया।
खलीलाबाद शहर के गोश्त मंडी रोड रजानगर मोहल्ला स्थित मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया का निरीक्षण 3 नवंबर को किया गया। जहां भूतल व प्रथम तल पर अवैध निर्माण पाया गया। जिसके बाद प्रबंध तंत्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद प्रबंध तंत्र ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने 13 नवंबर को यथास्थिति बनाए रखने और दो सप्ताह में प्रतिउत्तर एसडीएम कोर्ट में दाखिल करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने छह सप्ताह के अंदर मामले को निस्तारित करने का आदेश दिया। उसके बाद एसडीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने पाया कि प्रस्तावित नक्शा स्वीकृत कराने के लिए आवेदक की तरफ से कोई प्रयास नहीं किया गया और न ही संयुक्त नियोजक की ओर से उठाई गई आपत्ति का निराकरण करते हुए संशोधित नक्शा प्रस्तुत किया गया। बिना नक्शा स्वीकृत कराए ही मदरसे का निर्माण करा लिया गया।
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मदरसे पर चस्पा हो चुका है नोटिस
एसडीएम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद विनियमित क्षेत्र मगहर के नियत प्राधिकारी की तरफ से मदरसा गिराने के लिए नोटिस चस्पा कर दिया गया है। साथ ही प्रबंधतंत्र को 15 दिन का समय भी दिया गया है। 15 दिन के अंदर मदरसा प्रबंधतंत्र यदि खुद भवन को गिरा लेता है तो ठीक है। नहीं तो प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा और उसका संपूर्ण व्यय भूराजस्व बकाया के रूप में वसूल किया जाएगा।
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...तो बिना स्वीकृत नक्शे के ही मिल गई थी मान्यता
खलीलाबाद शहर के गोश्त मंडी रोड स्थित मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया की मान्यता पर सवाल खड़ा हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि मान्यता के दौरान भवन का नक्शा व विवरण भी दिया जाता है। जब नक्शा पास ही नहीं करवाया गया था तो मदरसे को मान्यता कैसे दे दी गई। विभाग के अधिकारियों ने अगर उस समय ही इस पर ध्यान दिया होता, तो उसी समय मामला पकड़ में आ गया होता। इसमें कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब मान्यता दी तो नक्शा व अन्य कागजात क्यों नहीं देखे गए और इसका भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
प्रबंध तंत्र मदरसे के नक्शे से संबंधित कोई कागजात नहीं प्रस्तुत कर सका। इसकी वजह से मदरसा गिराने का आदेश जारी किया गया है। प्रशासन यदि मदरसे को गिरवाता है तो उसका संपूर्ण व्यय भी प्रबंध तंत्र से वसूल किया जाएगा। -अरुण कुमार, एसडीएम खलीलाबाद