मेंहदावल। नटवा बिचऊपुर में चल रहे रुद्र महायज्ञ में में सोमवार को चित्रकूट धाम से पधारीं प्रवचनकर्ता दीप्ति मिश्रा ने कहा कि भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पूजा की परंपरा की शुरुआत कराई। ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा करते थे। भगवान कृष्ण ने उन्हें बताया कि वर्षा और जीवन के लिए तो गोवर्धन पर्वत भी अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए सबको गोवर्धन पर्वत की भी पूजा करनी चाहिए।
इस पर ब्रजवासियों के इंद्र की पूजा छोड़ गोवर्धन की पूजा करनी शुरू कर दी। इससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए। उन्होंने बदला लेने के लिए मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। बारिश इतनी भयानक थी कि ब्रजवासी डर गए। भगवान कृष्ण ने छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी। कृष्ण ने सात दिनों तक पर्वत को अपनी उंगली पर उठाए रखा। किसी को भी नुकसान नहीं हुआ। पर जब इंद्र को पता चला कि मुकाबला करने वाले स्वयं कृष्ण हैं, तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने क्षमा मांगी और बारिश रोक दी।
इस अवसर पर मुख्य यजमान उमा महेश्वर शुक्ल, सर्वेश त्रिपाठी, राधेश्याम मिश्र, घंटू मिश्र, योगेंद्र मिश्र, रामलौट सिंह, सत्यव्रत मिश्र आदि मौजूद रहे।