धर्मसिंहवा/धनघटा। शनिवार को धर्मसिंहवा थाने पर समाधान दिवस एसडीएम अरुण कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई। एसडीएम के समक्ष आए राजस्व संबंधी प्रार्थना पत्र को उन्होंने राजस्व कर्मियों को सौंपा और तत्काल निस्तारण करने का निर्देश दिया।
थाना क्षेत्र के सेवहां चौबे गांव निवासी गोपाल चौबे पैमाइश और सीमांकन की समस्या को प्रस्तुत किए उन्होंने पक्की पैमाइश के लिए एसडीएम न्यायालय में पूर्व में वाद दाखिल किया था जो पूर्णतया अमल में नहीं लाया जा सका है। संबंधित लेखपाल को एसडीम अरुण कुमार ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में निस्तारण करने का निर्देश दिया।
इस गांव के प्रसिद्ध चौबे आबादी की जमीन में एक नाली में अपने नाली का पानी जोड़ने का प्रार्थना पत्र दिए। उनका आरोप है कि विपक्षी उस नाली में उनकी नाली को जोड़ने नहीं दे रहा है। इस विषय पर एसडीएम ने राजस्व कर्मी को मौके पर जाकर प्रकरण को निस्तारण किए जाने के लिए कहा। टोटहा गांव निवासी मिश्री ने बताया कि पैमाइश के बाद लेखपाल द्वारा लगाया गया पत्थर विपक्षियों ने उखाड़ दिया है। एसडीएम ने हल्के के लेखपाल को प्रार्थना पत्र के निस्तारण का निर्देश। समाधान दिवस पर ज्यादातर मामले पैमाइश व सीमांकन से ही जुड़े हुए दिखे, जिसे अब लेखपाल भविष्य में समय पाकर मौके पर जाएंगे और निपटारा करेंगे। एसओ सुरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि समाधान दिवस पर कुल पांच मामले आए। निपटारे के लिए राजस्व टीम गठित की गई। धनघटा प्रतिनिधि के अनुसार, धनघटा थाने पर आयोजित समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देने पहुंचे रामपुर निवासी रामनाथ का कहना था कि घर के बगल स्थित जमीन को पड़ोसी ने जबरन कब्जा कर लिया है। जिसका पैमाइश करके जमीन पर कब्जे की मांग को लेकर सात बार प्रार्थना पत्र दे चुका, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
गायघाट निवासी दयाराम का कहना है कि उनके खेत के बगल से होकर नाला गया हुआ है। नाले के पास उनका और गांव निवासी एक व्यक्ति का खेत है। नाला की सफाई हुई तो वह दयाराम के खेत में चला गया। जबकि बगलगीर का खेत जितना था उतना ही है। नाला की पैमाइश करके उसे सही स्थान पर करने की मांग को लेकर छह बार समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दे चुका, लेकिन नाला की पैमाइश नहीं किया गया। जगदीशपुर निवासी अवध राज का कहना था कि घर से बगल होकर रास्ता गया हुआ है। उस रास्ते को उनके घर के बाद पड़ोसी द्वारा अवरुद्ध कर दिया गया। पैमाइश करके रास्ते को खुलवाने की मांग की। इसी तरह रामनौकर, ठाकुर दिन, यशवंत, बाबूलाल, अवधेश आदि का कहना था कि संपूर्ण समाधान दिवस हो या समाधान दिवस सब केवल नाम का रह गया है। कहीं पर भी प्रार्थना पत्र देने के बाद त्वरित कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे लोगों की समस्या बढ़ती चली जा रही है।