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Sant Kabir Nagar News: सादे कागज और रसीदी टिकट पर बिक रही करोड़ों की जमीन

Mon, 18 Dec 2023 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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मेहदावल। आजादी के 75 साल बाद भी मेंहदावल में जमींदारी व्यवस्था में जमीनों का सौदा हो रहा है। आजादी के तीन साल बाद भले ही जमींदारी उन्मूलन कानून लागू कर दिया। इसके बाद भी इस नगर पंचायत में सादे कागज और रसीदी टिकट पर करोड़ों की जमीन बिक रही है। इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए दो पूर्व विधायकों ने शासन को पत्र भी लिखा, पर कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
जमींदारी उन्मूलन कानून लागू हुए 73 साल हो गए। पर, मेंहदावल क्षेत्र की 50 हजार की आबादी आज भी इसी व्यवस्था के कैद में है। सरकार भी जमींदारों से राजस्व वसूलती है। वहीं, जमींदार लोगों को बसाने के नाम पर चौथ के रूप में लगान वसूलते हैं। यहां करोड़ों की जमीन मात्र सादे कागज पर रसीदी टिकट लगाकर बिक जाती है। जमींदार सरकार को राजस्व देते हैं। इसकी भरपाई के लिए शहरी क्षेत्र की जमीनों पर बसे लोगों से जमींदार बसने वालों से वसूली करते हैं।
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18 साल पहले नगर पंचायत ने शुरू किया था विरोध
जमींदारी व्यवस्था से जमीनों की खरीदफरोख्त के कारण सरकारी खजाने को हर साल करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है। इसे समाप्त करने के लिए 18 साल पहले 2005 में तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष स्व. राधेश्याम कांदू ने शासन को पत्र लिखा। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इसी समय तत्कालीन विधायक अब्दुल कलाम ने भी नगर पंचायत क्षेत्र से जमींदारी व्यवस्था को समाप्त करने के लिए शासन को पत्र लिखकर पहल करने की मांग की थी। शासन ने इस मामले में जिलाधिकारी से आख्या मांगी थी। लेकिन मामला लटक गया। जमींदारी व्यवस्था से नगर पंचायत क्षेत्र मुक्त नहीं हो सकी।
अभिलेख में जमींदार का नाम, वसूलते है लगान
ऐसी जमीनों के रूप में राजस्व अभिलेखों में जमींदार का नाम ही अंकित होता है। निर्मित मकान के स्वामी किसी दूसरे को बेचता है तो जमींदार बिक्री धनराशि की चौथ वसूल करते हैं। कस्बे के दिलीप कुमार, रामसमुझ, बदरे आलम, नंदलाल, श्रवण कुमार, राजकुमार ने बताया कि भले ही कस्बे में मकान बने हुए हैं, लेकिन मकान को यदि दूसरे को बेचा जाता है तो जमींदार को लगान देनी पड़ती है। पूर्व में तो प्रतिवर्ष घरों से जमींदार के आदमी लगान की वसूली भी करते थे, लेकिन यह प्रथा बंद हो गई। अब चौथ के साथ ही मकान निर्माण के दौरान खिड़की दरवाजा लगाने के दौरान जमींदार को नजराना देना पड़ता है।
दो पूर्व विधायक का प्रयास भी असफल



जमींदारी उन्मूलन व्यवस्था के खिलाफ मेंहदावल के दो पूर्व विधायकों ने शासन से पत्राचार किया। इसमें सपा के पूर्व विधायक अब्दुल कलाम और भाजपा के राकेश सिंह बघेल शामिल है। दोनों विधायकों ने नगर पंचायत की जमींदारी व्यवस्था को समाप्त करने के लिए शासन में पत्र लिखा था। शासन ने जिलाधिकारी रिपोर्ट भी मांगी थी। मेंहदावल तहसील प्रशासन ने उक्त मामले में अपनी जांच आख्या भी जिलाधिकारी को सौंपा था। तत्कालीन जिलाधिकारी ने जांच आख्या शासन में भेजी थी। इसके बाद इसे समाप्त करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष और दो पूर्व विधायकों द्वारा शासन से इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए पत्राचार करने के बाद भी समाप्त न होना। स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहा है। शासन ने दोनों पूर्व विधायकों के पत्र पर स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी। इसके बाद भी स्थानीय प्रशासन की निष्यक्रियता के कारण जमींदारी व्यवस्था मनमाने तरीके से चल रही है। इसके कारण खजाने को हर साल करोड़ाें रुपये का नुकसान हो रहा है।
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जमींदारी व्यवस्था के संबंध में पूर्व में शासन से आख्या मांगी गई थी। जिसे काफी पहले भेजा गया है। वर्तमान समय में शासन से जमींदारी व्यवस्था से संबंधित कोई मामला संज्ञान में नहीं है। नगर में आज भी जमींदारी उन्मूलन नहीं हुआ है।
अरुण कुमार, एसडीएम
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