जिला अस्पताल में जगह नहीं, कैसे बनेगा ट्रामा सेंटर।
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संतकबीरनगर जिले के ट्रामा सेंटर बनाने के लिए जिला अस्पताल में जमीन नहीं मिल पाई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ट्रामा सेंटर बने कहां? बिना जमीन के हवा में तो बनाया नहीं जा सकता? ट्रामा सेंटर खुलने से दुर्घटना में गंभीर घायलों का इलाज हो पाता। फिलहाल, ऐसे मरीजों को गोरखपुर, बस्ती या लखनऊ रेफर किया जा रहा है।
उधर, सीएमएस ने स्वास्थ्य महानिदेशक को अस्पताल परिसर में जमीन उपलब्ध नहीं होने की रिपोर्ट भेज दी है। बता दें कि स्वास्थ्य महानिदेशक ने जून माह में जिला अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर खोलने के लिए सीएमएस से जमीन उपलब्ध कराने को कहा था।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेज और ट्रामा सेंटर खोलने की स्वीकृति दी थी। विभाग न तो ट्राम सेंटर के लिए जमीन खोज पाया न ही मेडिकल कॉलेज के लिए। इस कारण दोनों ही योजनाएं अधर लटक गई हैं। मेडिकल कॉलेज पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर खोला जाना है। इसके लिए किसी निजी अस्पताल ने भी रुचि नहीं दिखाई है।
सीएमएस ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया तो उन्हें ट्रामा सेंटर बनाने के लिए उपयुक्त जमीन नहीं मिली। अस्पताल परिसर में कर्मचारी व चिकित्सकों के आवास, एमसीएच विंग, दो-दो ऑक्सीजन प्लांट, वन स्टाप सेंटर, वैक्सीन सेंटर, सार्वजनिक शौचालय, पोस्टमार्टम हाउस, डायलिसिस सेंटर, प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, आयुष विंग अस्पताल आदि का निर्माण हो चुका है। इस वजह से अब अस्पताल परिसर में जमीन नहीं बची है।
सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने कहा कि अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर का निर्माण होना था। अस्पताल परिसर में जमीन नहीं बची है कि ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया जा सके। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य महानिदेशक को भेजी जा चुकी है। अब जैसा निर्देश होगा, आगे की कार्रवाई की जाएगी।