श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनकर हर्षित हुए श्रोता
संवाद न्यूज एजेंसी
रोसयाबाजार। ब्लॉक क्षेत्र के शंकरपुर के बक्शीजोत स्थित श्री राम जानकी मंदिर में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ चल रही है। पांचवें दिन शुक्रवार को शैलेश शास्त्री ने श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई। इसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
उन्होंने कहा कि जब भी पृथ्वी पर आसुरी शक्तियां अपने पैर फैलाने लगती हैं, तब भगवान किसी न किसी रूप में इस धरा पर अवतरित होकर धरती एवं धरती वासियों के कष्ट को हरण करते हैं।
कथा प्रसंग को आगे बढ़ते हुए कहा कि कंस ने अपनी अति प्रिय चचेरी बहन देवकी की शादी बड़े धूमधाम के साथ वासुदेव के साथ की। जैसे ही बरात विदा होने लगी आकाशवाणी हुई कि जिस बहन को इतना दुलार करते हो, उसकी आठवीं संतान तेरा काल बनेगी।
कंस ने अपनी मौत के भय से दोनों को कारागार में बंद कर दिया और देवकी के एक-एक करके छह पुत्रों को मार दिया। सातवें पुत्र को संकर्षण के माध्यम से रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया गया, जो बलराम के नाम से जाने गए। जबकि जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण का आठवीं संतान के रूप में अवतरण हुआ। जैसे ही वह पैदा हुए जेल के ताले खुल गए। बेड़ियां खुल गईं और वासुदेव ने अपने सिर पर रखकर यमुना जी को पार करके अपने पुत्र को ले जाकर गोकुल में नंद जी के घर पहुंचा दिया।
उसी दिन उनके यहां जन्म लेने वाली महामाया को अपने साथ ले आए। इसको कंस ने मारने का प्रयास किया। वह कंस के हाथ से छिटककर विंध्य पर्वत पर चली गई। जहां से आकाशवाणी हुई कि तू मुझे क्या मारेगा। तुझे मारने वाला पैदा हो चुका है।
वहां गोकुल में लाला होने की खुशी में बड़ी धूमधाम से बधाइयां बजने लगीं। नंद और यशोदा जी ने बहुत सारी गायों आदि को दान कर दिया। इससे गोकुल का माहौल खुशियों से भर गया।
इस मौके पर धर्मवीर, रामसूरत यादव, रामदास, लालमन यादव, श्री राम यादव, रामचंद्र, रामनेवास, मुन्नुलाल, अमृतलाल, गिरीरंग दूबे, अनंत लाल आदि मौजूद रहे।