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Sant Kabir Nagar News: दौलतपुर में सरयू कर रही कटान, नदी खेतों से 25 मीटर दूर

Wed, 01 Jul 2026 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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संतकबीरनगर/ लोहरैया। धनघटा तहसील क्षेत्र के दौलतपुर गांव के पास सरयू नदी की कटान जारी है। यह कटान अभी नदी क्षेत्र में हो रही है, लेकिन यदि इसे रोका नहीं गया तो जल्द ही कटान खेतों तक पहुंच जाएगी। कटान स्थल से खेतों की दूरी करीब 25 मीटर ही है। ग्रामीण इसे लेकर चिंतित हैं। वहीं बाढ़ से बचाव को लेकर भी काम धीमा होने से ग्रामीण परेशान हैं। उनका कहना है कि बाढ़ के समय जलस्तर बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
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सरयू नदी में संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन की तैयारियां अभी भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी हैं। बाढ़ शरणालय की व्यवस्था, साफ-सफाई व अन्य सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों में अभी से चिंता बढ़ती जा रही है। हर साल बाढ़ के दौरान एमबीडी बांध और सरयू नदी के बीच बसे कई गांवों के लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर मौर स्थित जय नारायण इंटर कॉलेज तथा तिघरा स्थित श्रीसत्यनारायण इंटर कॉलेज को बाढ़ शरणालय बनाया जाता है।
आवश्यकता पड़ने पर श्रीमती सावित्री देवी महिला महाविद्यालय को भी रिजर्व शरणालय के रूप में रखा जाता है। इन केंद्रों पर तहसील प्रशासन और बाढ़ खंड विभाग द्वारा राहत किट, खाद्यान्न, पशुओं के लिए भूसा तथा अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।
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गायघाट, ढोलबजा, सियरकला, गुनवतिया, भौवापार, सरैया, करणपुर, चकदहा सहित एमबीडी बांध और सरयू नदी के बीच बसे सभी गांवों के लोग बाढ़ आने पर एमबीडी बांध और इन शरणालयों में शरण लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक शरणालयों में तैयारी शुरू नहीं हुई है, जबकि बरसात शुरू हो चुकी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ के समय बांध से गांवों तक आने-जाने के लिए पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।
कई गांवों का संपर्क पूरी तरह जलमग्न हो जाता है, जिससे मरीजों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए पर्याप्त नावों को रिजर्व रखकर आवश्यकतानुसार संचालन की व्यवस्था की जानी चाहिए। वहीं दौलतपुर में सरयू नदी द्वारा बलुई मिट्टी की कटान जारी है। फिलहाल कटान खेती योग्य भूमि से कुछ दूरी पर है, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। ग्रामीण रमेश का कहना है कि प्रशासन को बाढ़ आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। शरणालयों की तैयारी और नावों की व्यवस्था पहले से कर देनी चाहिए।
सत्यप्रकाश ने कहा कि बाढ़ के समय गांवों का संपर्क कट जाता है। ऐसे में पर्याप्त नाव उपलब्ध रहेंगी तो लोगों को राहत मिलेगी और आपात स्थिति में मदद पहुंचाना आसान होगा। ग्राम प्रधान पप्पू ने कहा कि हर साल बाढ़ में ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
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