कहा कि यह धरती सूफी संत कबीर की है। आज कबीर के विचारों को अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। इस महोत्सव से किसी न किसी को कुछ न कुछ लाभ जरुर हुआ होगा और सदगुरु कबीर से प्रेरणा भी मिली होगी। सद्भावना,एकता, प्रेरणा यहां से प्रदान हो, इसके लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है।
एसडीएम सतीश मणि त्रिपाठी ने कहा कि महोत्सव को सकुशल संपंन कराने में सभी ने अपनी सहभागिता दी है। जनता की सहभागिता के साथ सुधार की जरुरत है।
सदगुरु कबीर ने कहा कि जो आज है ,वह कल खत्म हो जाएगा। अपने कर्म ऐसे करने चाहिए कि जीवन सफल हो जाए। कबीर के नाम पर यह आयोजन ही अपने आप ही सफलता की कहानी बयां कर रहा है।
संस्थापक सदस्य नासिर अली खां ने कहा कि समिति में नए लोगों के आने की जरुरत है।
महोत्सव और बेहतर ढंग से हो,इसके लिए मिलजुकर प्रयास करना चाहिए,ताकि कबीर की जो वाणी है वह दूर - दूर तक पहुंचे सकें।
वेद प्रकाश चौबे ने कहा कि कबीर की वाणी यहां की संस्कृति और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन, सात दिन में प्रस्तुत करना अपने आप में एक उपलब्धि है।
अभिजीत श्रीवास्तव ने कहा कि सदगुरु कबीर ने सत्य और अहिंसा की बात की है। कथनी और करनी में अंतर नहीं रखा। रूठने और मनाने का सिलसिला चलता रहेगा, स्वार्थी नहीं परमार्थी बने। जिया अंसारी ने कहा कि कबीर ने सदैव एकता और प्रेम की बात कहीं है।
कबीर के विचारों को आत्मसात करने की जरुरत है। कार्यक्रम में शिव कुमार गुप्त, सुभाष शुक्ल, नुरुज्जमा अंसारी,अवधेश सिंह ,रामशंकर यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन वेद प्रकाश चौबे ने किया। इस अवसर पर रणजीत सिंह,मुख्तार अंसारी,अबरार आलम, खलील खान, अजय सिंह वर्मा, फैजखान फैजी,मेराज खान,जय प्रकाश गुप्त, कुलदीप मिश्र, रवि प्रकाश पांडेय,अनिल श्रीवास्तव ,निजामुद्दीन ,बद्री श्रीवासतव, बीएसए महेंद्र प्रताप सिंह आदि उपस्थित रही।