कबीर ने विश्व को मानवता का संदेश दिया: महंत विचार दास
- दूसरे दिन सत्संग, प्रवचन व भंडारे का हुआ आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
मगहर। सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली मगहर में 502वां परिनिर्वाण दिवस मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को सत्संग, प्रवचन के साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान देश के विभिन्न प्रांतों से आए साधू संत, श्रद्धालुओं ने कबीर के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
सत्संग को संबोधित करते हुए महंत विचार दास ने कहा कि सद्गुरु कबीर देश के महान संत रहें है। जिन्होंने ऊंच नीच, भेद-भाव, छुआछूत व धर्म के विभेद को दूर कर विश्व को मानवता का संदेश दिया। जिससे समाज में प्रेम सौहार्द, भाईचारे को फैलाया जा सके। उन्होंने मानव धर्म को सबसे बड़ा धर्म बताया। प्रेम व आपसी मेल मिलाप से कुछ भी हासिल करना मुमकिन है। कबीर के विचारों को आज पूरा विश्व आत्मसात कर रहा है और उनके विचार कल प्रासंगिक थे और आज भी है। बड़ोदरा गुजरात से आए महंत कमलेश साहेब ने कहा कि वर्तमान परिवेश में पूरे विश्व को कबीर के विचारों की आवश्यकता है। जिससे विश्व स्तर पर फैली सामाजिक बुराईयों, आपसी मतभेदों को मिटाया जा सके। उनकी वाणियों को आत्मसात करें तो विश्व पटल पर आतंकवाद, आर्थिक, पर्यावरण जैसी अन्य कई समस्याओं का स्वत: निदान संभव है। बस्ती से आए रामलखन उर्फ लाल बाबा ने कबीर की साखी जेहि मरने से जग डरे, मेरे मन आनंद कब मरिहौ, कब पहिऔ पुरण परमानंद से की।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य अपने आप को दुखो से मुक्त करना है। सद्गुरु के शरण में जाते है पीड़ा लेकर तो गुरु का उपदेश प्राप्त होता है। हमारा जीवन निर्मल है। जब जीवन पूर्णता की ओर बढ़ता है तो मन निर्मल होता है तो अंत कण में भाव जगता है। सत्संग को महंत ईश्वर साहेब, महंत दयानंद साहेब, संत अरविंद दास शास्त्री, साध्वी नीरव साहब ने संबोधित किया। इस अवसर पर पुजारी शांति दास, महंत कन्हैया दास, संत केशव दास, रामशरणदास, विनोद दास, मनोज दास, दिनेश दास, अवधेश दास आदि मौजूद रहे।