- दो दिन में जमीन से संबंधित 130 मामलों का कर दिया था निस्तारण
- उप संचालक चकबंदी गोरखपुर ने प्रकरण की जांच में पाया दोषी
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। खलीलाबाद तहसील में दो दिन में जमीन से संबंधित 130 मामलों के निस्तारण के प्रकरण की जांच में संबंधित न्यायिक तहसीलदार चंद्रिका प्रसाद शुक्ल दोषी पाए गए हैं। गोरखपुर के उप संचालक चकबंदी की जांच रिपोर्ट पर उनकी दो वेतन वृद्धि पर शासन स्तर से रोक लगा दी गई है। चंद्रिका प्रसाद शुक्ल वर्तमान में सुल्तानपुर जिले में तैनात हैं।
सितंबर 2023 में खलीलाबाद के चकबंदी अधिकारी रहे चंद्रिका प्रसाद शुक्ल ने न्यायिक तहसीलदार का प्रभार मिलने पर दो दिन में 130 मामलों का निस्तारण कर दिया था। आरोप है कि बिना तथ्यों की जांच और सभी पक्ष को सुने उन्होंने फाइलों का निस्तारण कर दिया था। महुली क्षेत्र के छितही गांव निवासी हफीजुर्रहमान की शिकायत पर तत्कालीन डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने एडीएम वित्त जय प्रकाश से जांच कराई तो गड़बड़झाला उजागर हो गया था।
एडीएम की जांच में पाया गया कि तत्कालीन चकबंदी अधिकारी चंद्रिका प्रसाद शुक्ल को 19 सितंबर 2023 को तहसीलदार न्यायिक खलीलाबाद का प्रभार मिला। 20 सितंबर को उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया और राजस्व संहिता के 33 मामले निस्तारित कर दिए। इसके बाद 21 सितंबर को 97 मुकदमे निस्तारित कर दिए। जांच में पाया गया कि प्रभारी न्यायिक तहसीलदार चंद्रिका प्रसाद शुक्ल ने कई मामलों में बिना अभिलेखों का परीक्षण किए ही आदेश जारी कर दिए। उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया।
इसके बाद तत्कालीन डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने चकबंदी विभाग के उच्चाधिकारियों को विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र लिखा तो मामले की विभागीय जांच उप संचालक चकबंदी गोरखपुर राजनारायण त्रिपाठी को सौंपी गई थी। उनकी जांच में न्यायिक तहसीलदार की लापरवाही सामने आई। उन्होंने अपनी रिपोर्ट जून में ही चकबंदी आयुक्त को भेज दी थी। मामले की जांच की प्रगति के संबंध में हफीजुर्रहमान ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी। इसके जवाब में लखनऊ स्थित चकबंदी आयुक्त कार्यालय से बताया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन न्यायिक तहसीलदार चंद्रिका प्रसाद शुक्ल की दो वेतन वृद्धि रोक दी गई है।
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एक शिकायत की जांच में खुले 130 मामले
महुली क्षेत्र के छितही गांव निवासी हफीजुर्रहमान ने 19 मार्च 2024 को डीएम से शिकायत की कि न्यायिक तहसीलदार की मिलीभगत से उनके परिवार की बहू ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर मकान का एग्रीमेंट किसी और को कर दिया। हफीजुर्रहमान का कहना था कि उन्होंने अपने तीन भाइयों के साथ मिलकर नगर पालिका कार्यालय के पास 1983 में जमीन खरीदी थी। वर्ष 2018 में मकान बनाया। अविवाहित भाई अजीजुर्रहमान के निधन के बाद उसका हिस्सा मां को मिला। एक जनवरी 2023 को एक अन्य भाई अली अहमद की मौत हो गई। अली के बेटों इफ्तेखार और शादाब को हिस्सा मिला। मई 2023 में शादाब की मौत हो गई। हफीजुर्रहमान का आरोप था कि शादाब की पत्नी ने कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और न्यायिक तहसीलदार चंद्रिका प्रसाद शुक्ल को साजिश में शामिल करके जमीन और मकान का 80 लाख रुपये में मगहर निवासी एक आदमी को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कर दिया। जबकि मकान में सभी का हिस्सा था। डीएम ने जांच कराई तो 130 मामले सामने आ गए, जिनमें बिना जांच आदेश जारी किए गए थे।
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किसी और ने नहीं दर्ज कराई शिकायतन्यायिक तहसीलदार द्वारा दो दिन में 130 केस निस्तारित करने के मामले में सिर्फ हफीजुर्रहमान ने ही डीएम से शिकायत की थी। इसकी जांच में न्यायिक तहसीलदार दोषी पाए गए हैं। अन्य 129 केस से जुड़ा कोई भी व्यक्ति शिकायत करने नहीं आया इसलिए कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। हफीजुर्रहमान का मामला इस समय दीवानी न्यायालय में विचाराधीन है।
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मामले की जांच पूर्व में की गई थी। इसमें विभागीय कार्रवाई के लिए चकबंदी विभाग को पत्र भेजा गया था। कार्रवाई वहीं से होनी थी। हालांकि इस प्रकरण में अभी एक ही शिकायत है। अन्य कोई शिकायत नहीं आई है। अगर शिकायत आती है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी।
- जय प्रकाश, एडीएम, वित्त एवं राजस्व