संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर/ मेंहदावल। जिले में नर्सिंग होम की जांच में लापरवाही बरती जा रही है। इस कारण बड़े हादसों से इन्कार नहीं किया जा सकता है। नर्सिंग होम में अग्निशमन उपकरण हैं तो, लेकिन उनकी जांच नियमित नहीं होती है। कुछ स्थान पर अग्निशमन उपकरण भी नहीं मिले।
जिले में शहर से लेकर गांव तक नर्सिंग होम का जाल बिछा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में केवल 57 ही पंजीकृत हैं। इसमें पैथोलॉजी भी शामिल हैं। इस तरह देखा जाए तो पंजीकरण में भी लापरवाही बरती जा रही है। हालांकि विभाग के मुताबिक पंजीकरण के लिए कई के आवेदन भी आए हैं।
मेंहदावल बाईपास पर एक नर्सिंग होम में अग्निशमन उपकरणों को देखकर ऐसा लगा कि लंबे समय से इनकी जांच नहीं की गई है। यहां बैठी एक महिलाकर्मी ने बताया कि अग्निशमन विभाग के लोग काफी पहले आए थे। इसी तरह मेंहदावल रोड पर एक नर्सिंग होम में आपातकालीन दरवाजा दिखा। अग्निशमन के उपकरण भी दिखे, लेकिन यहां भी उपकरणों की जांच हाल के दिनों में हुई हो ऐसा नहीं लगा। इसी रोड पर एक छोटे नर्सिंग होम में तो अग्निशमन उपकरण ही नहीं थे।
दूसरी ओर मेंहदावल तहसील क्षेत्र में भी कई नर्सिंग होम नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रहे हैं। आग से बचाव के लिए न पाइप लाइन बिछाई गई है न इमरजेंसी दरवाजा है।
अग्निशमन विभाग व स्वास्थ्य महकमा यहां भी उदासीन है। जानकारी के मुताबिक इलाके में करीब 10 नर्सिंग होम ऐसे हैं जिनके पास अग्निशमन की पूरी व्यवस्था नहीं है। यदि कहीं आग लगने की घटना हो जाए तो मरीज तथा उनके परिजनों को निकालने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी।