मेंहदावल में शिलापट पर अंकित स्वतंत्रता सेनानी इस्माइल का नाम। संवाद
मेंहदावल। नगर पंचायत के ठाकुरद्वारा वार्ड निवासी इस्माइल ने 14 वर्ष की अवस्था में अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। उन्होंने क्षेत्र के अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ मिलकर देश की आजादी का इतिहास लिखने में अहम भूमिका निभाई।
सिद्धार्थनगर के बांसी के राजा चंगेरा के विरुद्ध 1930 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बिगुल फूंका, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गिरफ्तारी हुई। मेंहदावल क्षेत्र के निवासी सेनानी पंडित लालसा प्रसाद मिश्र के इलाहाबाद के नैनी जेल जाने के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इस्माइल ने आंदोलन की कमान संभाली और अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचार के विरुद्ध बस्ती में आंदोलन का नेतृत्व किया।
उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांतिकारियों को संगठित कर स्वतंत्रता आंदोलन की रफ्तार तेज कर दी। उन्हें ढूंढने के लिए अंग्रेजी सरकार ने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन सफल नहीं हो पाई। 1942 से 1943 तक वह जेल में भी रहे। स्माइल के पोते जुल्फेकार ने बताया कि बाबा की आजादी की लड़ाई तथा अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का इतिहास जब लोगों की जुबानी हम लोग सुनते हैं तो खुद के ऊपर गर्व महसूस होता है लेकिन दर्द यह है कि उनके परिवार की सुध लेने की दिशा में सरकारी तंत्र पहल नहीं कर रहा।
कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजन ऐसे हैं जो भुखमरी के कगार पर हैं। इन्हें सरकार की तरफ से कोई सुविधा आज तक नसीब नहीं हुई।
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इस्माइल का पोता बेचता है फल-सब्जी और जूस
नगर के ठाकुरद्वारा वार्ड निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इस्माइल का परिवार दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है। पोता जुल्फेकार परिवार चलाने के लिए ठेला लगाकर पूरे नगर पंचायत में फल, सब्जी, जूस आदि बेचता है। अभी तक परिवार टिनशेड में रहता था, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला और उन्हें पक्की छत नसीब हो गई। आपूर्ति विभाग की लापरवाही के कारण इस परिवार को लाल कार्ड की व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई। जुल्फेकार ने बताया कि लाल राशन कार्ड के लिए आपूर्ति विभाग, एसडीएम तथा कोटेदार के पास जाकर थक गया हूं लेकिन अब तक हमारे परिवार को लाल कार्ड नसीब नहीं हो पाया।