संतकबीरनगर। महुली पुलिस ने अंतरजनपदीय मोटरसाइकिल चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे और निशानदेही पर चोरी की पांच मोटरसाइकिलें और तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने देवरिया, लखनऊ और बाराबंकी समेत कई जनपदों से मोटरसाइकिल चोरी करने की बात स्वीकार की है। पुलिस अब बरामद वाहनों का रिकॉर्ड खंगाल रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अन्य किन जिलों में चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है। एएसपी सुशील कुमार सिंह ने घटना का अनावरण करते हुए पूरे मामले की जानकारी दी।
एएसपी सुशील कुमार सिंह ने बताया कि महुली पुलिस, एंटी थेफ्ट सेल और सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम को यह सफलता मिली। थानाध्यक्ष दुर्गेश कुमार पांडेय को सूचना मिली कि मैनसिर चौराहे के पास तीन युवक अलग-अलग मोटरसाइकिलों के साथ संदिग्ध हालत में खड़े हैं। उनके पास चोरी की बाइक होने की संभावना है।
सूचना पर पुलिस टीम ने मैनसिर नहर पुलिया के पास घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया। पूछताछ में उनकी पहचान रामचंद्र गुप्ता निवासी रामपुर थाना खलीलाबाद, प्रियांशु सिंह उर्फ सिंटू निवासी खरवनिया कला थाना महुली और कुनाल निवासी इमिलडीहा थाना सहजनवां, गोरखपुर के रूप में हुई।
सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपियों ने चोरी की कई वारदात का खुलासा किया। रामचंद्र ने बताया कि पहली मोटरसाइकिल उसने अपने एक साथी के साथ देवरिया के मईल थाना क्षेत्र से चोरी की थी। दूसरी बाइक प्रियांशु और अन्य साथियों के साथ लखनऊ के इटौंजा-बीकेटी क्षेत्र से चोरी की गई, जबकि तीसरी मोटरसाइकिल बाराबंकी से चोरी की गई।
पुलिस ने उनकी निशानदेही पर मैनसिर स्थित आरओ प्लांट के पास छिपाकर रखी गई दो अन्य चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद कर लीं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय भेज दिया है। साथ ही बरामद मोटरसाइकिलों के संबंध में संबंधित जिलों की पुलिस से संपर्क कर स्वामित्व और चोरी के मुकदमों का सत्यापन कराया जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि पूछताछ में गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और कई अन्य चोरी की घटनाओं का भी खुलासा हो सकता है।
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पैसा कमाने के लिए बनाया था बाइक चोरी का गैंग
एएसपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे सभी बेरोजगार हैं और आसानी से पैसा कमाने के लिए बाइक चोरी का गिरोह बनाकर अलग-अलग जिलों में वारदात करते थे। चोरी के बाद मोटरसाइकिलों की पहचान छिपाने के लिए कई बार नंबर प्लेट हटा देते थे और फिर उन्हें कम कीमत पर बेच देते थे। बिक्री से मिलने वाली रकम को सभी सदस्य बांट लेते थे और उसी से खर्च चलाते थे। शुक्रवार को भी वे चोरी की मोटरसाइकिलों को बेचने के लिए जा रहे थे, लेकिन उससे पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए।