धनघटा। क्षेत्र के शनिचरा बाजार निवासी सनोज अग्रहरि की पत्नी ने 7 जनवरी को शनिचरा बाजार अस्पताल में बेटे को जन्म दिया। बेटे की तबीयत खराब हुई तो उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
वहां 10 जनवरी की रात बच्चे की मौत हो गई। 11 जनवरी की सुबह जब बच्चे के शव को दफन किया जाने लगा तो उसे बेटी देख परिजनों के होश उड़ गए।
सनोज अग्रहरि का कहना है कि उनकी पत्नी प्रीति अग्रहरि को जब 7 जनवरी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो उसे सीएचसी शनिचरा बाजार ले जाया गया। उसी रात प्रीति ने बेटे को जन्म दिया। 10 जनवरी को बच्चे की तबीयत खराब हुई तो जिला अस्पताल खलीलाबाद ले जाया गया। गंभीर स्थिति के चलते उसे मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेज दिया गया। सनोज का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में इलाज चल ही रहा था कि बताया गया कि बच्चे की मौत हो गई है। उसका शव लेकर घर आए।
11 जनवरी की सुबह शव को दफनाने गए तो लड़की का शव देखकर उनके होश उड़ गए। सनोज का कहना है कि लड़की के शव को लेकर पुनः मेडिकल कॉलेज गए। वहां काफी हंगामा हुआ। उसके बाद जांच में पता चला कि जिस बच्ची का शव सनोज के बच्चे का बताया गया था वह गोरखपुर की रहने वाली दूसरी महिला की बच्ची का था।
वहां पर उस महिला के परिवार के लोगों ने बच्चे के शव को दफन किया था वहां पर जाकर देखा गया तो वह बेटे का निकला। उसके बाद दोनों बच्चों के शव को वहीं पर दफन कर दिया गया। सनोज का कहना है कि मेडिकल प्रशासन ने इसे मानवीय भूल माना है।