मगहर कस्बे के काजीपुर मोहल्ले के धोबी टोला निवासी नजमा पत्नी अब्दुल करीम उर्फ झीनक का आरोप था कि उसका 16 वर्षीय बेटा अब्दुल नसीम मगहर में एक सैलून की दुकान पर काम करता था।
सैलून के मालिक का नाम ठाकुर है। आरोप था कि उसके देवर मोहम्मद इस्लाम से उसका मकान के हिस्से के बंटवारे का विवाद चल रहा है।
उसके बेटे अब्दुल नसीम को 22 मार्च 2013 की रात आठ बजे के करीब उसके देवर मोहम्मद इस्लाम बुला कर ले गया। देर रात तक बेटा वापस नहीं लौटा तो परिजनों ने तलाश शुरू की, लेकिन कहीं कोई पता नहीं चला।
25 मार्च 2013 को सोसायटी के पीछे कुएं में उसके बेटे की लाश मिली थी। आरोप था कि उसके देवर मोहम्मद इस्लाम और अन्य लोगों ने मिल कर उसके बेटे की हत्या कर दी और शव को कुएं में डाल कर छिपा दिया था।
पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो मजबूरी में उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट के आदेश के बाद तीन दिसंबर 2014 को पुलिस ने आरोपी मोहम्मद इस्लाम, वेदी, जहीरुल हसन उर्फ झिनकान और ठाकुर के खिलाफ हत्या कर शव छुपाने और जानमाल की धमकी देने के मामले में मुकदमा दर्ज किया था।
22 फरवरी 2015 को डीएम के निर्देश के बाद तहसीलदार अरविंद सिंह की देखरेख में कब्र खुदवा कर अब्दुल नसीम का कंकाल एकत्र कर निकाला गया था।
कंकाल का पोस्टमार्टम पुलिस ने कराया तो मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुआ और बिसरा सुरक्षित कर दिया गया था। विवेचक एसएसआई रुदल यादव ने बताया कि बिसरा रिपोर्ट में किशोर की मौत मल्टीपल इंजरी यानि मृत्यु पूर्व आई चोटों से हुई। विवेचना के क्रम में कुएं का निरीक्षण किया।
यह देखा कि कुएं में कोई ऐसी चीज तो नहीं है जिससे किसी व्यक्ति के गिरने से घातक चोट आ जाए और मृत्यु हो जाए। पानी भी निकलवाया गया। बारीकी से जांच के बाद कुंए में बडे़ - बडे़ ईट पत्थर अथवा लोहा आदि नहीं मिले,जो मौत का कारण बन सकते थे।