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भारत पड़ोसियों को परिवार मानता है न कि बाजार : श्री प्रकाश मणि

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एचआरपीजी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबो​​​धित करते प्रोफेसर श्रीप्रकाश म​णि-स्रोत काॅलेज
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संवाद न्यूज एजेंसी
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संतकबीरनगर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रोफेसर श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि भारत पड़ोसी प्रथम की नीति का पालन करता है। भारत पड़ोसियों को परिवार मानता है, न कि बाजार। भारत सदैव अहैतिक नीति का पालन करता है। इसमें वह अपने पड़ोसी देशों की बिना किसी शर्त और बिना लाभ की इच्छा के मुक्तहस्त सहायता करता है।
वे शुक्रवार को एचआरपीजी कॉलेज में भारतीय वैश्विक परिषद की तरफ से अनुदानित भारत की पड़ोसी प्रथम नीति : चुनौतियां एवं विकल्प पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत पड़ोसियों से सिर्फ व्यापारिक रूप से नहीं जुड़ा है, बल्कि हम एक सांस्कृतिक विरासत को भी साझा करते हैं। उन्होंने नेपाल के साथ चल रहे “ सिस्टर सिटी प्रोजेक्ट “ की चर्चा की। इसमें जनकपुरी और अयोध्या, काशी और काठमांडू तथा लुंबिनी और बौद्ध गया के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास चल रहा है।
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इसके साथ ही अपने भारतीय विदेश नीति के सॉफ्ट पावर पॉलिसी की भी चर्चा की, जिसमें कनेक्टिविटी, कल्चर और कॉमर्स के जरिये भारत अपने पड़ोसी देशों से संबंध को मजबूत करने का अनवरत प्रयास कर रहा है। प्रोफेसर श्रीप्रकाश त्रिपाठी ने पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता, चीन की साम्राज्यवादी नीति और संगठित आतंकवाद जैसी चुनौतियों की भी चर्चा की।
जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय छपरा के प्रोफेसर सरोज कुमार वर्मा ने कहा कि भारत ने सदैव अपने पडोसी देशों से मित्रतापूर्ण संबंध बनाने का प्रयास किया है परन्तु कई बार पड़ोसी देशों ने इसका गलत फायदा भी उठाया है। उन्होंने अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा बस सेवा बहाल करने तथा पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जिक्र किया। कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल जैसे पड़ोसी देशों की राजनीतिक अस्थिरता और चीन के बढ़ते दखल हमारे लिए चुनौती है। इसके साथ ही भारतीय लोकतंत्र को भी अस्थिर करने के लिए संगठित प्रयास किया जा रहा है जिसके लेकर हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है।
भारतीय वैश्विक परिषद नई दिल्ली के वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. अतहर जफर ने भारतीय वैश्विक परिषद के उद्देश्यों एवं कार्यक्रमों पर कहा कि भारतीय वैश्विक परिषद भारत और अन्य देशों के बीच सहयोग तथा मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रोत्साहित करता है।
इसके साथ ही यह शिक्षा, संस्कृति, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी विकसित करता है तथा वैश्विक मुद्दों पर संवाद, शोध और विचार-विमर्श को बढ़ावा देता है। आर्यभट्ट महाविद्यालय दिल्ली यूनिवर्सिटी से आए डॉ. शिवपूजन पाठक ने कहा कि भारत सिर्फ एक राष्ट्र राज्य नहीं अपितु यह एक सभ्यतागत राष्ट्र रहा है। इसलिए भारतीय विदेश नीति को समझना है तो हमें इसके 5000 वर्ष के लंबे इतिहास को समझना जरूरी होगा। गोष्ठी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुलभ इंटरनेशनल डॉ अनिल दत्त मिश्र ने भी संबोधित किया।
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कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ब्रजेश त्रिपाठी और संचालन डॉ. शशिकांत राव ने किया। इस अवसर पर सचिव प्रबंध समिति अंकित रूंगटा, प्रो. डीएन पांंडेय, प्रो. मंजू मिश्रा, डॉङ सुनीता त्रिपाठी, डॉ रीना पाठक, डॉ अभय प्रताप सिंह, डॉ राम पाण्डेय, डॉ संतोष सिंह, डॉ निरंकार त्रिपाठी, डॉ राजेश सिंह, डॉ दुर्गेश पाल, डॉ प्रवीण मिश्रा, डॉ संध्या रॉय, डॉ राजीव सिंह, डॉ गजेन्द्र उबारन गिरी, डॉ भारत गौतम, डॉ हंसराज कुशवाहा, डॉ अजय मिश्र, डॉ शिव प्रताप, डॉ चन्द्र प्रकाश पटेल, डॉ अजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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