कुर्थिया में छात्र की मौत के बाद गमजदा परिजन।
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डेढ़ माह पहले हादसे में घायल हुए छात्र की उपचार के अभाव में रविवार को घर पर ही मौत हो गई। बेटे की मौत से गमगीन परिजनों को मलाल था कि गरीबी के कारण ठीक से उपचार नहीं करा पाए।
कोतवाली क्षेत्र के कुर्थिया निवासी 15 वर्षीय सुधाकर पुत्र रामकरन कक्षा आठवीं का छात्र था। सुधाकर को 19 नवंबर 2016 को साइकिल से स्कूल जाते समय कुर्थिया चौराहे पर एक स्कूटर सवार ने टक्कर मार दी थी। घटना स्थल पर जुटे लोगों की मदद से 108 नंबर की एंबुलेंस से घायल को पहले जिला अस्पताल फिर रेफर किए जाने पर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेजवाया गया था। 20 नवंबर को मेडिकल कॉलेज में भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया। यहां मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, हालत में सुधार न होने पर प्राइवेट अस्पताल ले गए।
रकम के अभाव में वे लोग सुधाकर को 29 नवंबर को घर वापस लेकर चले आए। पीड़ित पिता रामकरन का दर्द था कि पैसे के अभाव में बेटे का ठीक से उपचार नहीं करा पाया। आखिरकार बेटे सुधाकर ने घर पर ही रविवार को दम तोड़ दिया। मृतक के पिता ने कहा कि बेटे के उपचार के लिए दिसंबर में ही आनलाइन मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय में आवेदन करके बेटे के इलाज के लिए सहायता मांगी थी।
रकम न मिलने पर दस दिसंबर के करीब बेटे को दुबारा मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले गया, जहां ठीक से बेटे का उपचार नहीं हुआ और बेटे को वापस घर लेकर चला आया था। आरोप था कि यदि समय से सरकारी मदद मिल गई होती और बेटे का उपचार ठीक से हो गया होता तो शायद बेटे की जान बच सकती थी। पीड़ित परिजनों का रो- रो कर बुरा हाल था। खबर पर कांटे चौकी पुलिस मौके पर पहुंच गई और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।