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जीवन के हर संस्कार में लोक गीतों का महत्व: एएसपी

Tue, 20 Feb 2024 11:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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हरिहरपुर। जीवन के हर संस्कार में लोक गायकी का बड़ा महत्व है। विभिन्न संस्कृतियों को खुद में समेटे इस देश में लोगों का लोक गीतों से गहरा जुड़ाव है। यह बातें मंगलवार को हरिहरपुर में कवि रंगपाल की जयंती पर बतौर मुख्य अतिथि एएसपी शशि शेखर सिंह ने कही। कार्यक्रम की शुरुआत कवि रंगपाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ।
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उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में आयोजित संस्कारों में माताओं-बहनो के जरिए स्थानीय गीतों को गाया जाता है। ऐसी ही एक विधा फाग भी है। जिसके लय-ताल ऋतुराज के आगमन का उत्साह भरते हैं। कवि रंगपाल को महाकवि बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जयंती में शरीक होना मेरे लिए सौभाग्य का विषय है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि कवि रंगपाल की कृतियों को फिर से संजोया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने आयोजक को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम के आयोजक पाल सेवा संस्थान के अध्यक्ष बृजेश पाल ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम को क्षत्रिय महासभा पूर्वांचल के अध्यक्ष उग्रसेन सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आफताब आलम, रवींद्र प्रताप सिंह, चंद्रमणि त्रिपाठी ने संबोधित किया। इस दौरान अनिमेश पांडेय, उमेश पाल, देवेश पाल, सोनू एडवोकेट, निरंकार मणि त्रिपाठी ,राम अचल आदि मौजूद रहे।
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नगाड़े की थाप पर थिरके लोग

हरिहरपुर। कवि रंगपाल की जयंती पर जिले भर से आए लोक गायकों ने कवि रंगपाल के गीतों की प्रस्तुति से माहौल मे फागुन का रंग घोल दिया। नगाड़े की थाप पर स्थानीय गायक मेवालाल, राम किशोर दीवान, फूलचंद्र, प्रेमदास, सु्क्खू ने ''''केहि विधि समुझाय, हाय पिया मानत नाहीं'''' की प्रस्तुति देकर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। गायक अजय श्रीवास्तव के गीत जरा दे जाते दिलवर दीदार हुए ऐसे क्यों बेवफा और गायक हमीद शास्त्री के गीत कैसे फाग खेलइया हो मानत नहीं दइया, रेडियो कलाकार नबी करीम बच्चा के फाग गीत बिलमि रह्यो बालम कवने देशे और गायक कलाम के गीत औरन संग रैन बिताते हो बालम, भोर भए घर आते की प्रस्तुति पर लोग झूम उठे।
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