संतकबीरनगर। जिले के दक्षिणांचल में स्थित धनघटा तहसील क्षेत्र में बहने वाली घाघरा नदी को बालू माफियाओं ने अवैध खनन करके छलनी कर दिया। खनन के कारण नदी की धारा दक्षिण से उत्तर की तरफ बढ़ कर प्रतिवर्ष तबाही मचाती है। अवैध खनन पर रोकथाम लगाने के जिम्मेदार कभी-कभार बालू लदे ट्रैक्टर- ट्राॅली को पकड़कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने की खानापूर्ति निभाते रहे हैं, लेकिन अवैध खनन थमने का नाम नहीं ले रहा है।
रामपुर से गायघाट दक्षिणी तक करीब 35 किलोमीटर इस जिले की सीमा में घाघरा नदी प्रवाहित होती है। एक दशक पहले इस नदी के किनारे से जब बालू का खनन नहीं होता था, तो नदी की धारा अंबेडकरनगर और आजमगढ़ के जिले की सीमा में बहा करती थी, लेकिन जब बालू माफियाओं की कुदृष्टि इस पर पड़ी तो जगह- जगह तेजी से अवैध रूप से बालू खनन का कार्य शुरू हो गया। कहीं दिन के उजाले में तो कहीं रात के अंधेरे में बालू खनन करके बालू के कारोबारी मालामाल होने लगे।
इसका नतीजा यह हुआ कि नदी की धारा दक्षिण से उत्तर की दिशा में मुड़कर वर्ष 2013 में तुर्कवालिया नायक गांव की तरफ बहने लगी और पास में एमबीडी बांध को तोड़ दिया। इसके बावजूद अवैध खनन पर रोक नहीं लगा और खनन जारी रहा तो नदी की धारा भी स्थायी रूप से धनघटा तहसील क्षेत्र में ही बहना शुरू हो गई।
इतना ही नहीं बरसात के समय में नदी तबाही तो मचाती ही है, साथ ही गायघाट दक्षिणी गांव के 45 परिवारों को दो वर्षों में कटान करके बेघर कर दिया है। इसी बीच प्रशासन ने एक खेल और खेला, जिस छपरा मगर्वी गांव का अभिलेख तहसील से गायब होने की बात बताई जा रही है, और वहां के किसानों को खतौनी नहीं मिल पा रही है। पैमाइश के लिए नक्शा उपलब्ध नहीं है। किसान सम्मान निधि का लाभ पाने से वंचित हैं।
उसी छपरा मगर्वी में 3.364 हेक्टेयर भूमि वर्ष 2017 में बालू खनन के लिए पट्टा कर दिया गया। बालू खनन के लिए पट्टा की गई जमीन कहां है, इसकी जानकारी गांव के लोगों को नहीं है, लेकिन बालू खनन कराने वाले लोग मनचाहे स्थान पर खनन करा रहे हैं। इतना ही नहीं बालू खनन का कार्य पोकलैंड मशीन से नदी में भी किया जा रहा है, जो नदी की धारा मुड़ने में सहायक हो रही है।
ग्रामीण देवेंद्र कुमार, जयराम, राजेश, लालजी, राम भवन, सुभाष आदि का कहना है कि बालू खनन से घाघरा नदी की धारा उत्तर की दिशा में बढ़कर बांध और नदी के बीच बसे गांव में तबाही तो मचाती ही है, एमबीडी बांध पर भी खतरा उत्पन्न हो गया है। घाघरा नदी किनारा अवैध बालू खनन और अवैध रूप से कच्ची दारू के उत्पादन का हब बन चुका है।
अवैध रूप से बालू खनन करने वालों के विरुद्ध सूचना पर कार्रवाई की जाती है। पिछले वर्ष 146 ट्रैक्टर-ट्राॅली को पकड़कर 38 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया, जबकि दो मामले में एफआईआर भी दर्ज कराया गई थी। इस वर्ष 27 गाड़ी को पकड़कर साढे़ छह लाख जुर्माना वसूला जा चुका है, जबकि लिंक एक्सप्रेस-वे के कर्मचारियों के खिलाफ अवैध बालू खनन की रिपोर्ट धनघटा थाने में दर्ज कराई जा चुकी है। 15 दिन से छपरा मगर्वी में बालू खनन का कार्य बंद है। अवैध रूप से बालू खनन कतई नहीं होने दिया जाएगा।
-नरेश महतो, जिला खनन निरीक्षक