जिला अस्पताल में बंद रहा अल्ट्रासाउंड कक्ष।
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अल्ट्रासाउंड कराना हो तो समय से पहुंचे अस्पताल
- सुबह 8 से 11 बजे तक सिर्फ 50 लोगों का होता है अल्ट्रासाउंड
न करा पाने वाले मरीजों की दूसरे दिन के लिए करना पड़ता है इंतजार
संतकबीरनगर। प्रदेेश सरकार जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दावा कर रही है, वहीं इससे इतर जिला अस्पताल में व्यवस्था बदहाल है। यहां पर तीन घंटे तक ही अल्ट्रासाउंड होता है। निर्धारित समय के बाद आने वाले मरीजों को दूसरे दिन इंतजार करना पड़ता है। गंभीर मरीजों को बाहर प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जाना मजबूरी बन गई है।
जिला अस्पताल में अगस्त माह में रेडियोलाजिस्ट डॉ. वीके चौधरी की संबद्धता समाप्त हो गई और वह सीएमओ कार्यालय में अपने मूल पद पर वापस हो गए। उसके बाद जिला अस्पताल में एक माह तक अल्ट्रासाउंड ठप हो गया था। काफी हो हल्ला के बाद जिला अस्पताल में तैनात दो रेडियोलॉजिस्ट में से एक पर किसी तरह से दबाव बनाकर अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी दी गई। वह भी आठ बजे आते हैं और 11 बजते-बजते चले जाते हैं। दूसरे रेडियोलॉजिस्ट अपनी जिम्मेेदारी से हट गए। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक रेडियालॉजिस्ट के जिम्मे सिर्फ 50 अल्ट्रासाउंड ही करने का नियम है। अगर उन पर दबाव बनाया जाएगा तो वह भी नहीं आएंगे। ऐसे में किसी तरह से अल्ट्रासाउंड का कार्य कराया जा रहा है। जबकि प्रतिदिन जिला अस्पताल में 150 से 160 मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल का संचालन सुबह आठ बजे से दो बजे तक का है। मंगलवार को अल्ट्रासाउंड कराने पहुंच बखिरा निवासी रामकेश ने बताया कि पेट में कई दिनों से दर्द बना हुआ है, चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड लिखा है। यहां आया तो अल्ट्रासाउंड बंद हो गया है। अभी 11 बज रहे हैं। यहां पर तैनात कर्मियों ने बुधवार सुबह बुलाया है। यही हाल अन्य मरीजों का भी रहा। इस संबंध में सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने कहा कि एक चिकित्सक को 50 अल्ट्रासाउंड करने का ही नियम है। वह आते हैं और अल्ट्रासाउंड करते हैं। जिन मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है, उन्हें दूसरे दिन बुलाया जाता है, जो भी संसाधन है, उसी में मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।