खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में आयोजित जन साहित्यक मंच के काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ करते कवि
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में कवि गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें कवियत्री ज्योति सिंह ने अपनी रचना अगर जंग हो अपनों से तो बेशक हारना अच्छा, स्वयं की हार को भी प्रेम से स्वीकारना अच्छा। सुनाकर कवि गोष्ठी की शुरूआत की।
हामिद खलीलाबादी ने चमन तो होगा चमन में न होगी रामाई, रहेंगे फूल मगर ताजगी को तरसोगे। सुनाया, जिसे सराहा गया। राधेश्याम मिश्र श्याम ने श्याम वो छोड़ गया कल जो हमदम था, हाल मेरा मैं नहीं जानता कब पूछेगा। सुनाकर बेवफा दोस्तों की ओर इशारा किया। सुरेश यादव ने नन्हें पांव से पखारती है घर बार, बेटी नहीं लक्ष्मी सी लगती है कविता सुनाकर कविता के महत्व को बताया। वयोवृद्ध कवि छबिराज राज ने एक दिन सजाई आखिर बंसवा कै डोली, काहे बाबू बोला प्रेमवा कै बोली। सुनाकर सभी को प्रेम से रहने के लिए अपील किया।
युवा शायर हलीम मेंहदावली ने दिल की हर बात निगाहों से बता ही देंगे, दास्तां दर्द का चुपके से सुना ही देंगे। सुनाकर वाहवाही लूटी। युवा कवि राजेश मृदुल ने मॉ तेरा लाडला रहा हूं मैं, कोख में तेरे पला बढ़ा हूं मैं। सुनाकर मां की याद दिलाई। पवन श्रीवास्तव सबा ने कफस ही को रिहाई मानता हूं, मै दुश्मन को भी भाई मानता हूं। सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया। हरिभजन सिंह भजन ने किसी का दर्द लेकर सादमानी कौन देता है, किसी को दान में अपनी जवानी कौन देता है सुनाया।
अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने अपनी पेंशन के लिए आप पीटते मेज, पेंशन देने में सदा करते हैं परहेज.. सुनाया। शिवा पांडेय, शरिक खलीलाबादी, ओम प्रकाश गौतम, सूरज कुंवर, देवानंद आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।