संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दुबे ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी चंद्रेश उर्फ भदेश को संदेह का लाभ पाते हुए बरी कर दिया।
रामधनी ने 21 अक्तूबर 2011 को कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया कि पुत्री कौशिलया की शादी चंद्रेश से आठ वर्ष पूर्व हुई थी। उसके तीन बच्चे हैं। चंद्रेश उसकी पुत्री कौशिल्या को मारता-पीटता है। घर के अन्य लोग भी प्रताड़ित करते थे। 15 मार्च 2011 की रात चंद्रेश ने घर के अन्य पांच लोगों के साथ मिलकर बेटी को मार डाला। साक्ष्य को मिटाने के लिए लाश को जला दिए। कोर्ट के आदेश पर थाना बखिरा में केस दर्ज हुआ। विवेचना के बाद अन्य आरोपियों के नाम को विलोपित करते हुए आरोपी चंद्रेश के विरुद्ध पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दुबे की कोर्ट में बहस सुनने के बाद पाया कि मृतका की मृत्यु उल्टी और दस्त आने के कारण हुई है, जो मृतका के पिता ने समझौते में कहा है। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दुबे की कोर्ट ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी पति चंद्रेश उर्फ भदेश निवासी सिसवनिया, गुलेरा थाना बखिरा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।