परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में सुस्ती, किसानों को मुआवजे के लिए करना होगा इंतजार
- खलीलाबाद से बहराइच तक रेल लाइन के लिए छह साल पहले मिली है परियोजना को मंजूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। खलीलाबाद से बहराइच तक नई रेल लाइन बिछाई जानी प्रस्तावित है। अब तक प्रशासन भूमि अधिग्रहण में ही अटका हुआ है। परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में देरी हो रही है। किसानों की संख्या तक का निर्धारण नहीं हो पाया है। इस वजह से किसानों को मुआवजे के लिए इंतजार करना पड़ेगा। जबकि प्रथम चरण में खलीलाबाद से बांसी तक 54 किमी दूरी तक रेल लाइन बिछानी जानी है। इस काम को वर्ष 2024 में पूरा करना है।
खलीलाबाद से बांसी, बलरामपुर-श्रावस्ती से होकर बहराइच तक नई रेल लाइन बिछाने की मंजूद वर्ष 2017 में मिली थी। खलीलाबाद से बहराइच तक करीब 240 किमी दूरी तक नई रेल लाइन बिछाई जानी है। इसमें संतकबीरनगर के 54, सिद्धार्थनगर के 93, बलरामपुर के 65, श्रावस्ती के 30 और बहराइच के 19 गांवों से होकर नई रेल लाइन जानी है। इसके लिए सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। जबकि बलरातपुर, श्रावस्ती और बहराइच में अभी सर्वे ही हो रहा है।
प्रथम चरण में खलीलाबाद से बांसी तक 54 किमी दूरी तक रेल लाइन बिछानी जानी है। इसमें संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद तहसील के 29 गांवों के किसानों की 75.128 हेक्टेयर जमीन और मेंहदावल तहसील क्षेत्र के 25 गांवों की 66.862 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है। इस प्रकार कुल 54 गांवों की 142 हेक्टेयर जमीन ली जानी प्रस्तावित है। संतकबीरनगर में धारा 19 का प्रकाशन हो चुका है। इसमें वन विभाग, लोक निर्माण, उद्यान व लघु सिंचाई विभाग को परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट देना है। पूर्व डीएम संदीप कुमार ने सितंबर तक किसानों को मुआवजा वितरित करने का दावा किया था, लेकिन अब तक प्रशासन यह तय नहीं कर पाया है कि नई रेल लाइन में जिले के जिन 54 गांवों की जमीन ली जानी है, उसमें कितनी संख्या में किसान हैं। दर का निर्धारण तक नहीं हो पाया है। रेलवे के मुख्य उप इंजीनियर रवींद्र मेहता ने बताया कि संतकबीरनगर में समन्वय स्थापित कर रेलवे लाइन के लिए काम में तेजी लाई गई है।
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खलीलाबाद से सिद्धार्थनगर हाेते हुए बलरामपुर-बहराइच को जोड़ने की परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। इस रेल लाइन के बन जाने से सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच तक का सफर आसान हो जाएगा। साथ ही, नेपाल आने-जाने में भी सहूलियत होगी।
विवेक छापडिया
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खलीलाबाद से बहराइच तक रेल लाइन बन जाने से आवागमन में सुविधा होगी। वर्ष 1971 से इस रेल लाइन की मांग उठ रही थी, लेकिन वर्ष 2017 में जब मंजूरी मिली तो लोग खुशी से झूम उठे। रेल प्रशासन को चाहिए कि इस परियोजना को जल्द पूर्ण कराए।
चंद्र प्रकाश सिंह
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बलरामपुर-बहराइच तक जाने के लिए सीधा रेल मार्ग नहीं है। वहां जाने के लिए गोंडा जाना पड़ता है या फिर गोरखपुर से ट्रेन के जरिए लोग सफर करते है। खलीलाबाद- बलरामपुर - बहराइच रेल लाइन बिछ जाने से रास्ता सुगम हाेगा।
अनिल कुमार
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खलीलाबाद-बांसी-बलरामपुर-श्रावस्ती से बहराइच तक रेल लाइन बिछ जाने से आवागमन में सुविधा होगी। पर्यटनके दृष्टि से भी नेपाल तक का सफर आसान हो जाएगा। रेल प्रशासन को चाहिए कि इस कार्य में तेजी लाए।
अखिलेश देववंशी
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कोट
काम में तेजी के लिए रेल मंत्री से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री से भी मिलकर मामले से अवगत कराएंगे। जिले व रेलवे के अधिकारियों से वार्ता कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण कर जल्द ही किसानों को मुआवजा दिलाने की पहल करेंगे, ताकि तय समय में कार्य पूर्ण हो सकें।
-प्रवीण निषाद, सांसद
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कोट
खलीलाबाद-बहराइच रेल मार्ग के लिए धारा 19 का प्रकाशन हो चुका है। परिसंपत्तियों का मूल्यांकन, दर निर्धारण और किसानों की संख्या आदि की रिपोर्ट जल्द तैयार कर ली जाएगी। इसके लिए एसएसओ और रेल अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। किसानों के मुआवजे के लिए 300 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। कोशिश है कि जल्द ही दस गांवों का पहले अवार्ड करा कर किसानों को मुआवजा का वितरण शुरू कराया जाए। किसानों को जल्द मुआवजा भी मिलेगा और तय समय सीमा में काम पूर्ण भी होगा। इसके लिए टीम भावना से कार्य कराया जाएगा।
- महेंद्र सिंह तंवर,डीएम