50 हजार के बजट में कैसे तैयार होगी खेल नर्सरी
- खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए मात्र दो कोच
- हाकी के लिए न कोच हैं, न ही खिलाड़ी
- कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम का हाल
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। ओलंपिक में जहां महिलाएं मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर रही हैं, वहीं जिले के खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में मंजिल से दूर हैं। जिले के कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम के दो कोच पर खिलाड़ियों को तैयार करने का जिम्मा है, लेकिन संसाधनों के अभाव के चलते वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। स्टेडियम को प्रति वर्ष 50 हजार रुपये का बजट मिलता है। इतने कम बजट खेल की बेहतर नर्सरी तैयार करना आसान नहीं है।
कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्थापना 15 वर्ष पूर्व हुई थी। यहां पर अब तक चार उप क्रीड़ा अधिकारी तैनात हो चुके हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम के जिम्मे ही विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को तैयार किया जाता है। इसी स्पोर्ट्स स्टेडियम से एथलेटिक्स में चार खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर चुके है, जिसमे सतेंद्र सिंह, संगीता, नीरज चौरसिया और राजेश यादव नौकायन शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने इसी स्टेडियम से तैयारी की और अपने मुकाम पर पहुंचे। ये सभी आज सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं। वर्तमान समय में स्टेडियम की हालत दयनीय हो चुकी है। स्टेडियम की रंगाई पुताई कई वर्षों से नहीं हुई है। इसके साथ ही मुख्य गेट पर लगा बोर्ड भी टूट चुका है। परिसर में झाड़ियां उगी हैं। स्टेडियम में मात्र दो कोच हैं, जिसमे प्रेम प्रकाश सिंह हैंडबाल के कोच हैं और उप क्रीड़ा अधिकारी दिलीप कुमार बास्केटबाल के खिलाड़ी हैं। यहां पर अन्य खेलों के कोच की दरकार है। संवाद
एथलेटिक्स कोच मिलने की संभावना
कांशीराम स्पोर्ट स्टेडियम को एथलेटिक्स कोच मिलने की संभावना है। इसके लिए उप क्रीड़ा अधिकारी ने भारतीय खेल प्राधिकरण को पत्र भी लिखा है। उम्मीद जताई जा रही है अगले माह तक कोच उपलब्ध हो जाएंगे।
जिले में नहीं है हॉकी का कोई खिलाड़ी
हॉकी खेल के लिए स्पोर्ट्स स्टेडियम में भी कोई पहल नहीं की जा रही है। इसके साथ ही जिले में हॉकी के खिलाड़ी भी नहीं हैं। खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए कोच की कमी सबसे बड़ी बाधा है। अगर स्टेडियम को कोच मिल जाए तो हो सकता है कुछ खिलाड़ी हॉकी के भी तैयार हो जाएं।
50 हजार के बजट से कैस सुधरेगा स्टेडियम
कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम का सालाना बजट मात्र 50 हजार रुपये है। इतने कम बजट में कैसे खिलाड़ी तैयार होंगे और कैसे परिसर में दशा सुधरेगी यह लोगों की समझ से परे है। इसी रकम से स्टेडियम के भवन की मरम्मत, साफ सफाई, रंगाई पुताई और खिलाड़ियों के लिए फील्ड को तैयार किया जाना है।
स्टेडियम में कोच की कमी है। भारतीय खेल प्राधिकरण को पत्र भेजकर कोच की मांग की गई है। इसके साथ ही परिसर की साफ सफाई व अन्य जरूरी संसाधन को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अभी 10 दिन पूर्व ही यहां का कार्यभार संभाला हूं। स्टेडियम को पूरी तरह से खिलाड़ियों से सुसज्जित कर दिया जाएगा।
दिलीप कुमार, उप क्रीड़ा अधिकारी, स्पोर्ट्स स्टेडियम खलीलाबाद