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Sant Kabir Nagar News: नियम कायदा नहीं मानते होटल, हादसा हो गया तो नहीं कर सकेंगे दावा

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होटल प्रबंधन ने सराय एक्ट के तहत नहीं कराया पंजीकरण
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-संचालकों को पर्यटन विभाग नोटिस भेजने की कर रहा तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अगर आप शहर समेत जिले के अन्य किसी होटल में ठहरने को सोच रहे हैं तो अपनी सुरक्षा का इंतजाम पहले समझ लें। वजह अगर यहां आपके साथ कोई हादसा हो गया तो किसी तरह का कोई दावा नहीं कर सकेंगे।
दरअसल, शहर के दो होटल के छोड़ दें तो अन्य होटल पर्यटन विभाग का कोई नियम कायदा नहीं मानते। पर्यटन विभाग के अधिकारी ऐसे होटल व लॉज के संचालकों को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं। यह होटल बिना पर्यटन विभाग की अनुमति के संचालित हो रहे हैं। सराय एक्ट में पंजीकरण के लिए होटल, लॉज और गेस्ट हाउस प्रबंधन को खाद्य सुरक्षा, अग्निशमन विभाग, पर्यावरण विभाग, बिजली निगम, नगर पालिका से एनओसी और पुलिस अधीक्षक से चरित्र प्रमाण पत्र लेना होता है। इतने विभागों से एनओसी लेने के लिए होटल में सब कुछ नियम कायदे के मुताबिक ही होना चाहिए, लेकिन इन सबसे बचने के लिए होटल प्रबंधन, सराय एक्ट के तहत पंजीकरण ही नहीं करा रहे हैं। ऐसे होटल संचालकों को पर्यटन विभाग नोटिस भेजने की तैयारी में है।
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खलीलाबाद शहर के दो प्रमुख होटल को छोड़ दें तो 13 होटलों की व्यवस्था जैसे-तैसे चल रही है। ग्राहकों की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोई गारंटी लेने वाला नहीं है। यदि किसी प्रकार ग्राहक के साथ कोई अनहोनी या गड़बड़ी हो भी जाए तो वह किसी तरह शिकायत या दावा करने की स्थिति में नहीं होता है। जबकि आए दिन इन होटलों में ग्राहकों के साथ किसी न किसी घटना की शिकायतें पुलिस तक पहुंचती रहती है। यदि पर्यटन विभाग या प्रशासन के अफसरों तक शिकायत पहुंचती भी है तो नियमों के तहत किसी दावे का आधार ही नहीं बनत, क्योंकि होटल, गेस्ट हाउस का रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता, सिर्फ नाम पर वह सब चल रहा है। रिकार्ड में कुछ भी नहीं है। ऐसे में सिर्फ एक ही रास्ता रह जाता और वह है पलिस। ग्राहक पुलिस को यदि राजी भी कर लेती है तो होटल संचालक वहां भी निपट लेते हैं। 0000000000000000000000000000000
अंग्रेजों के जमाने के नियमों की आड़ में हो रही मनमानी
बिट्रिश काल में वर्ष 1867 में सराय एक्ट बनाया गया था। अंग्रेजों के जमाने में इस एक्ट में आज भी होटलों का पंजीकरण किया जा रहा है। एक्ट में सराय से आशय ऐसे भवन माने गए, जिसे यात्रियों के आश्रय और आवास के लिए प्रयोग में लाया जाता हो। एक्ट में प्रावधान है कि डीएम कार्यालय में एक रजिस्टर रखा रहेगा, इसमें वह स्वयं उसके जरिए नामित व्यक्ति अपने अधिकार क्षेत्र के अंदर आने वाली सभी सरायों, सरायपालों के नाम,निवास स्थान की प्रविष्टि करेगा, लेकिन इन नियमों से कोई डरता नहीं है। इसलिए मनमानी की जा रही है।
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होटल संचालकों को सराय एक्ट में पंजीकरण कराना जरूरी है। नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा। जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनको नोटिस जारी कर जल्दी से पंजीकरण कराया जाएगा।
विकास नारायण- पर्यटन अधिकारी
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