लखनऊ में आयोजित हुई प्रमुख सचिव की बैठक से लौटने के बाद डीपीओ अरुण कुमार दूबे ने बताया कि कुपोषण बड़ी समस्या बन गई है।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए शासन ने पहल किया है। आगे बताया कि मार्च में सबसे पहले डीएम और सीडीओ के गोद वाले गांवों में गर्भवती को गरम भोजन दिए जाने की योजना लागू होगी।
जिसमें 13 दिन तक गर्भवती को चावल, दाल, रोटी, सब्जी दिया जाएगा। प्रत्येक महिलाओं पर 18 रुपये खर्च होगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम प्रधान का संयुक्त खाता खोला जाएगा।
उसी में खाते में पैसा भेजा जाएगा। आगे बताया कि लाल श्रेणी के अर्थात अति कुपोषित बच्चों को भी पोषाहार के अतिरिक्त गरम भोजन दिया जाना है।
प्रत्येक अति कुपोषित बच्चों पर सात रुपये खर्च होगा। अप्रैल से प्रदेश के सभी गांवों में गर्भवती और अति कुपोषित बच्चों को यह सुविधा दिए जाने का निर्णय हुआ है।
आगे बताया कि डीएम ने जिले के बघौली ब्लॉक क्षेत्र के औरंगाबाद और सिंहटीकर गांव को गोद लिया है। जबकि सीडीओ ने नाथनगर के सतहरा और बेलहर ब्लॉक के लगड़ाबार गांव को गोद लिया है।
इन चारों गांवों में करीब 200 गर्भवती महिलाएं इस योजना का लाभ पा सकेंगी। जबकि जिले में 1300 अति कुपोषित बच्चे चिह्नित है, जिन्हें अप्रैल से योजना का लाभ मिल पाएगा।
भोजन के तुरंत बाद महिलाओं को आयरन की गोली भी खिलाई जाएगी। इस योजना के लागू होने से निश्चित ही कुपोषण दूर होगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए संचालित होने वाली इस योजना की निगरानी की व्यवस्था सुनिश्वित कराई जाएगी। जिससे पारदर्शी तरीके से योजना का सफल संचालन हो सकें।