संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। ब्लाॅक के ग्राम पंचायत तिलजा में प्रधान का वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज किए जाने के आदेश को उच्च न्यायालय प्रयागराज ने अगली तिथि तक स्थगित कर दिया है।
अब ग्राम प्रधान पहले की तरह काम करते रहेंगें। न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने सोमवार को सुनवाई के दौरान आदेश दिया है।
ग्राम पंचायत तिलजा के ग्राम प्रधान के द्वारा मनरेगा योजना के तहत गांव में पोखरे का सुंदरीकरण कराया जा रहा था, जिसमें मनरेगा मजदूरों के साथ जेसीबी मशीन से काम कराए जाने की शिकायत मिली थी।
इस दौरान डीएम के निर्देश पर उप श्रमायुक्त ने 25 जून 2024 को स्थलीय निरीक्षण किया। इसमें जेसीबी से कार्य कराए जाने की पुष्टि हुई थी और मौके से जेसीबी बरामद हुई थी।
वहीं वेबसाइट पर मनरेगा मजदूरों की सूची भी पेश की गई थी। शिकायत सही मिलने पर जांच आख्या के आधार डीएम ने प्रधान के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज कर दिया था। उसके बाद ग्राम प्रधान ने उच्च न्यायालय की शरण ली।
याचिकाकर्ता ग्राम प्रधान मोहम्मद इनामुल्लाह कुरैशी की तरफ से पक्ष रखा गया कि केवल जेसीबी मशीन के उपयोग के आधार पर वित्तीय शक्तियां सीज कर ली गईं है, हालांकि जेसीबी के उपयोग के संबंध में श्रमशक्ति का सत्यापन नहीं किया गया। सत्यापन के बिना मशीनरी का उपयोग याचिकाकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई का आधार पाया गया।
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने कहा कि जेसीबी भी ऐसे व्यक्तियों द्वारा चलाई जा रही थी जिन्हें श्रमिक कहा जाता है और अगर सहायता के लिए और काम पूरा करने के लिए मशीन का उपयोग किया जाता है, जिन्हें श्रमिकों द्वारा चलाया जा रहा है तो यह नहीं कहा जा सकता है कि सरकारी निर्देश का उल्लंघन हुआ है।
इस दौरान न्यायालय ने कहा कि स्थायी अधिवक्ता तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकते हैं। साथ ही मामले को 22 नवंबर 2024 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई तक डीएम द्वारा पारित आदेश को स्थगित करने का आदेश दिया।