संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जेल प्रशासन ने बंदियों को हुनरमंद बनाने की ओर कदम बढ़ा दिया है। इसमें एक स्वयं सेवी संस्था मदद कर रही है। शुरुआती दौर में जिले के दस बंदियों को कंप्यूटर में दक्ष किया जा रहा है। इससे बंदी बाहर आने के बाद खुद का रोजगार कर सकेंगे।
राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद नीति के तहत समाजसेवी संस्था और जेल प्रशासन के बीच समझौता हुआ है। इसमें बंदियों को कंप्यूटर के साथ ही अन्य उत्पाद बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके पीछे मंशा है कि इन बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार का अवसर मिले। जिससे परिवार की आर्थिक सहायता कर सकें। जेल के बंदियों को हूनरमंद बनाने के लिए समाजसेवी संस्था तकनीकी एवं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान ने प्रदेश के दर्जन भर जेलों के साथ करार किया है।
संतकबीरनगर की जेल भी उसमें शामिल है। करार के अनुसार आने वाले तीन से पांच वर्षों तक संस्था जेल के कैदियों को प्रशिक्षण देती रहेगी। जिसे बाद में बढ़ाया भी जा सकता है। प्रशिक्षण में जेल प्रशासन पूरा सहयोग करेगा। इसी के तहत जेल प्रशासन के जरिए दी जाने वाली सुविधाओं में जेल के भीतर समुचित जगह, निश्चित कैदियों की संख्या, प्रशिक्षण सामान की सुरक्षा और बिजली का प्रबंध सम्मिलित है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कैदियों को प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
जेल से रिहा होने के बाद संस्था कैदियों को रोजगार उपलब्ध कराने में भी मदद करेगी। प्रशिक्षण अवधि में बंदियों को 100 से 150 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे। संस्था को होने वाले लाभ की रकम में से दस प्रतिशत रकम बंदियों के कल्याण पर खर्च होगा। रिहा होने के बाद संस्था बंदियों को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में मदद करेंगी। इन्हें कच्चा सामान और इको फ्रेंडली बैग भी देगी।
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ओडीओपी के तहत इन योजनाओं पर होगा काम
- चाय के प्यालों बनाने का काम
- एलईडी बल्ब बनाने का काम
- हवाई चप्पल बनाने का काम
- मशालों की पैकिंग
- ड्रेस बनाने का काम
- अगरबत्ती बनाने का काम
- बुक बाइंडिंग और स्क्रीन प्रिटिंग
- बिस्कुट केक और अचार बनाना
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- साबुन और फिनायल बनाना इंसेट बंदियों को तकनीकी रुप से दक्ष बनाने के लिए समाज सेवी संस्था की ओर से पहल की गई है। इसमें जेल प्रशासन पूरा सहयोग कर रहा है। शुरुआती दौर में दस बंदियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रयास है कि रिहाई के बाद बंदियों को सम्मानजनक रोजगार पाने में सहूलियत हो।
- जीआर वर्मा, जेलर