- दीपावली पर धुएं से विशेष सतर्क रहने की जरूरत
संतकबीरनगर। दीपावाली को लेकर दुकानों पर तेज ध्वनि के पटाखों के साथ ही रंग-बिरंगी आतिशबाजी की बिक्री हो रही है। लोग तेज आवाज के पटाखों को पसंद कर रहे हैं। ऐसे में यह ध्वनि हार्ट और दमा रोगियाें को नुकसान पहुंचा सकती है। आतिशबाजी करते समय काफी सावधान रहने की जरूरत है। जरूरी है कि दीपावाली पर तेज आवाज वाले बम-पटाखे न फोड़ें, इससे ध्वनि प्रदूषण तो होता ही है, साथ ही कान का पर्दा फटने का डर भी बना रहता है। बहुत ज्यादा पटाखे भी न फोड़ें, क्योंकि इसका धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ ही किसी दमा व एलर्जी वाले मरीज के लिए घातक है।
पटाखों में मौजूद छोटे कण सास लेने में परेशान कर सकते हैं उत्पन्न
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि पटाखों में मौजूद छोटे कण सास लेने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं और अस्थमा का दौरा पड़ सकता है। इसके अलावा पटाखों से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बनडाइआक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें होती हैं। ये गैस सांस की नली पर हानिकारक असर डालती है। पटाखा छोड़ते समय बुजुर्गाें और दमा रोगियों को दूर रखना चाहिए।
30 हजार डेसिबल की तीव्रता से अधिक ध्वनि कान के लिए खतरनाक
जिला अस्पताल के नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ एमके सिंह ने बताया कि तेज आवाज वाले बम व पटाखों से न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण फैलता है बल्कि यह कानों के लिए भी नुकसानदायक है। 20 से 30 हजार डेसिबल की तीव्रता तक की आवाज ही कान सहन कर सकता है। इससे अधिक तेज आवाज नुकसानदायक है। अधिक तेज आवाज होने से कान का पर्दा भी फट सकता है। कई बार इसका कान की हड्डियों पर भी फर्क पड़ता है। उन्होंने बताया कि अगर कान में घंटी बजे, कुछ देर तक कुछ सुनाई न दे तो इसका मतलब है कि पटाखा या बम अधिक तीव्रता का था। ऐसे में पटाखे बजाते समय कानों में कार्टन लगाएं, जिससे उसकी ध्वनि कम लगे।
ऐसे करें अपना बचाव
- विश्वसनीय ब्रांड और दुकान से ही पटाखे खरीदें।
- आसपास पानी की बाल्टी रख लें।
- शरीर को कपड़ों से ढंक लें और जूते पहनें।
- गाउन और छोटे कपड़े न पहनें।
- लंबी मोमबत्ती, अगरबत्ती या फूलझड़ी का इस्तेमाल करें।
- अपने आसपास के लोगों और जानवरों पर पटाखे न फेकें।
- सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे न जलाएं।
- पट्रोल, केरोसिन तेल, गैस सिलिंडर या कोई ज्वलनशील पदार्थ न रखें।