मेंहदावल। सीएससी मेंहदावल तहसील क्षेत्र का इकलौता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। जहां तीन विकास खंडों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। बेलहर कला विकासखंड में भवन बनकर तैयार है, लेकिन सीएससी का संचालन किराए के भवन में ही चल रहा है। मारपीट की घटना में पुलिस मेडिकल कराने मेंहदावल स्वास्थ्य केंद्र पर आती है। प्रतिदिन 200 से लेकर ढाई सौ मरीजों का इलाज यहां होता है।
30 शैय्या के स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती मरीजों का इलाज सीमेंटेड बेंच पर लिटाकर या स्ट्रेचर पर ही कर दिया जा रहा है। मरीजों के इलाज के दौरान बाहर से दवा लेना तीमारदार की मजबूरी बन गई है। वही ब्लड जांच से लेकर अल्ट्रासाउंड तक की व्यवस्था इलाज करने वाले चिकित्सक बाहर ही भेज रहे हैं।
अमर उजाला टीम ने मंगलवार की रात तथा बुधवार की सुबह सीएचसी की पड़ताल किया तो नजारा कुछ और ही नजर आया।
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रात्रि 9.30 बजे
सीएससी मेंहदावल में स्ट्रेचर पर इलाज कराती महिला दिखी। विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत ढोढ की महिला मरीज गीता (65) का इलाज स्ट्रेचर पर ही हो रहा था। परिवार की महिलाएं अगल-बगल खड़ी थीं। बात करने पर बताया गया कि उल्टी दस्त जैसी परेशानी होने के कारण 18 किलोमीटर दूर से यहां इलाज के लिए लाया गया है। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक देखें और स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने स्ट्रेचर पर ही लेटाकर ड्रिप चढ़ाना शुरू कर दिया। परिजनों के मुताबिक कुछ दवा हॉस्पिटल से मिली और कुछ इंजेक्शन डॉक्टर साहब ने छोटी पर्ची पर लिखकर बाहर से खरीदवाया।
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रात्रि करीब 10 बजे
थाना धर्मसिंहवा क्षेत्र की ग्राम सोहसा निवासी दर्शन देवी (65) को उल्टी दस्त की शिकायत पर परिजन सीएससी लाया गया। जहां इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साड़े कला के चिकित्सक डॉ. अवधेश गुप्ता ने उन्हें देखा दवा लिखी और सीमेंटेड बेंच पर लिटा कर इलाज शुरू करा दिया। कर्मचारियों ने यहीं पर ड्रिप भी लगा दी। जबकि भर्ती होने वाले मरीजों के लिए सीएससी के ऊपर वार्ड बनाए गए हैं, लेकिन यहां फर्श पर ही लिटा कर इलाज होता है।
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बुधवार सुबह 11 बजे
मेंहदावल विकासखंड के ग्राम खैराहवा निवासी द्रोपती (65) मारपीट में घायल हो गई थीं। जिन्हें पुलिस मेडिको लीगल के लिए सीएससी पर लाई थी। मेडिकोलीगल के बाद उनका इलाज स्ट्रेचर पर लिटाकर शुरू कर दिया गया। परिवार की महिलाएं चारों तरफ से खड़ी थी। यहां स्ट्रेचर तथा सीमेंटेड बेंच पर इलाज करना आम बात हो गई है। पंजीयन कक्ष में 11: 30 बजे इलाज के लिए आने वाले मरीजों को पंजीकरण कराने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है। पहले पंजीकरण के लिए पुराने भवन में काउंटर बनाया गया था, लेकिन वर्तमान समय में यहां से काउंटर बंद कर जनरेटर रखे जाने वाले मुर्गी के दरबानुमा छोटे से कमरे में पंजीकरण की व्यवस्था की गई है, जिसके कारण पंजीकरण करने वाले कर्मचारी तथा मरीज दोनों को इस उमस भरी गर्मी में परेशानी उठानी पड़ रही है।
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आठ अस्थायी तथा एक संविदा चिकित्सक है तैनात
मेंहदावल। सीएचसी पर कुल नौ चिकित्सक तैनात हैं, जिसमें आठ चिकित्सक अस्थायी हैं, जबकि एक दंत चिकित्सक संविदा पर तैनात है। महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। डॉ. लोकेश त्रिपाठी यहां गायनो चिकित्सक हैं। जनरल फिजीशियन, जनरल सर्जन तथा हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इनसे संबंधित मरीजों को जिला चिकित्सालय के लिए रेफर करना मजबूरी बन गई है।
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सीएचसी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की का प्रयास किया जा रहा है। इलाज के दौरान कुछ ऐसे दवाओं की आवश्यकता पड़ती है जिनकी व्यवस्था सीएचसी पर न होने के कारण बाहर से मंगाना पड़ता है। कुछ परिजन वार्ड में मरीज को भर्ती करने की जगह नीचे ही इलाज करने की जिद करने लगते हैं, जिसके कारण चिकित्सक की मजबूरी बन जाती है। सीएससी में 2024 तक ब्लड बैंक प्रारंभ हो जाएगा, इस दिशा में कार्य चल रहा है। ऑक्सीजन प्लांट के रिसाव को ठीक करा लिया गया है। वही टेलीमेडिसिन की व्यवस्था से सीएससी लैस है, फिर भी जो शिकायतें संज्ञान में आई है, उन्हें दूर किया जाएगा।
-डॉ. आईडी गौरव, अधीक्षक सीएचसी, मेंहदावल