धनघटा। विकास खंड हैंसर बाजार के ग्राम पंचायत रुपिन निवासी दिव्यांग हरिराम (68) अपने को जिंदा साबित करने के लिए दो साल से अधिकारियों के दरवाजे का चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक उन्हें कहीं से न्याय नहीं मिला।
दिव्यांग हरिराम का कहना है कि लंबे समय से उनको वृद्धा पेंशन मिलती थी, लेकिन दो वर्ष पहले 2024 में पेंशन बंद कर दी गई। काफी दिनों तक इंतजार करने के बाद पेंशन जब नहीं आई तो ब्लॉक पर पता किया, वहां बताया गया कि आपको मृत दिखाकर पेंशन रोक दी गई है। तभी से अपने को जिंदा साबित करने के लिए हरिराम दौड़ भाग कर रहे हैं, लेकिन कहीं से न्याय नहीं मिला।
हरिराम का कहना है कि ब्लॉक से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक प्रार्थनापत्र दिया जा चुका, लेकिन अभी तक कागज में न तो जिंदा किया गया और न हीं पेंशन आई। उनका कहना है कि बुढ़ापे का सहारा पेंशन ही थी वह बंद कर दी गई। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी उमेश प्रसाद ओझा ने कहा कि इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। पता करके कार्रवाई करेंगे। वृद्ध हरिराम अगर जिंदा हैं तो उन्हें मृत घोषित करने वाले के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।