संतकबीरनगर। जिले में हथकरघा कारोबार संकट में है। बुनकर अपना पुश्तैनी धंधा छोड़ने को विवश हो रहे हैं। वजह यह है कि बुनकरों को मांग के अनुरूप न तो बिजली मिल पा रही है और न ही बाजार। बाजार उपलब्ध कराने के लिए जो डिपो खुले भी, वह बेकार साबित हो रहे हैं। ऐसे में बुनकरों की रोजी-रोटी छिन रही है। कच्चे माल के दाम में बढ़ोतरी ने रही सही कसर पूरी कर दी है। खुले बाजार में लागत ही नहीं निकल पा रही है। इसके कारण बुनकर मशीन बंद कर अन्य कारोबार अपनाने को मजबूर हो रहे हैं। केंद्रीय बजट से बुनकरों में फिर उम्मीद जग गई है।
जिले के मेंहदावल, अमरडोभा, लेडुआ महुआ, पठान टोला, बेलहर सहित अन्य स्थानों पर बुनकरी उद्योग संचालित है। कभी पावरलूम कारोबार मुनाफे का सौदा था। इससे लोग जुड़ रहे थे, लेकिन अब महंगाई की मार और बिजली संकट से पावरलूम का कारोबार चौपट हो रहा है। कई पीढ़ियों से हुनरमंद हाथों से लिबास बुनने वाले कारोबारी अब संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। जिले में अब तक करीब 50 पॉवर लूम बंद हो चुके हैं। शहर के अंसार टोला में ही करीब 250 पॉवरलूम हैं।
बखिरा के अमरडोभा और मेंहदावल कस्बे में बुनकरों ने अपनी अलग पहचान बनाई। अब इन बस्तियों में हथकरघे और पॉवरलूम की आवाजें थमने लगी हैं। समय की मार और सरकारों की उपेक्षा ने इलाके के सैकड़ों परिवारों को बदहाली की कगार पर ला दिया है। बुनकरों को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति चाहिए, लेकिन वह भी नहीं मिल पा रही है। बुनकरी उद्योग से जुड़े बदरुज्जमा अंसारी, मोहम्मद यहिया, असगर अली, अहमद अली आदि लोगों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद सूत के दाम बढ़े हैं। बिजली भी महंगी मिल रही है। जिससे हैंडलूम चलाना मुश्किल हो गया है।
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महात्मा गांधी हैंडलूम योजना की घोषणा से राहत की उम्मीद
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने महात्मा गांधी हैंडलूम योजना की घोषणा की है। इससे बुनकरों, हैंडलूम और हस्तशिल्प कारीगरों को रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। बजट से ग्रामीण उद्योग, टेक्सटाइल, खादी, हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों को लाभ मिलने की संभावना है।
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महात्मा गांधी हैंडलूम योजना की घोषणा से हैंडलूम उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है। खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प के क्षेत्र में ग्रामीण कारीगरों को रोजगार, सुरक्षा और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। सरकार को बुनकरी उद्योग के लिए पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी। -इमामुद्दीन अंसारी- बुनकर
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महात्मा गांधी ग्राम स्वरोजगार योजना की पहले से ग्रामीण बुनकरों, हथकरघा और हस्तशिल्प कारीगरों को सामाजिक सुरक्षा, बीमा और आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है। इससे ग्राम स्तर पर रोजगार सृजन और आय में वृद्धि होगी। सरकार ने पहल तो की है, लेकिन बिजली के क्षेत्र में सुधार की जरूरत है। -मो. इलियास अंसारी- बुनकर
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महात्मा गांधी हैंडलूम योजना की घोषणा ग्रामीण उद्योग, टेक्सटाइल, खादी, हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम सही हैं। इसके साथ ही बुनकरों के लिए बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी कदम उठाए जाने की जरूरत है। -माे. यहिया- बुनकर
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यह जिला बुनकर बाहुल्य है। यहां बुनकरी उद्योग को बढ़ावा देकर विकास की गति तेज की जा सकती है। सरकार ने महात्मा गांधी हैंडलूम योजना की घोषणा की है। इससे बुनकरी उद्योग को लाभ मिलने की संभावना है। -शहनवाज, बुनकर
शहनवाज, बुनकर
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