मेंहदावल। गुरु ही अज्ञानता के अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। ये बातें ब्लॉक के नटवा बिचऊपुर में चल रहे रुद्र महायज्ञ में शनिवार देर शाम कथावाचक दीप्ति मिश्रा ने कथा का रसपान कराते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि गुरु अपने शिष्यों को आत्मज्ञान, सच और जीवन की सही राह दिखाते हैं। जो अज्ञान और भ्रम के अंधेरे को मिटाकर जीवन को सही दिशा देते हैं। जीवन भर अपने शिष्यों को सही रास्ता दिखाने का काम करते हैं। वह शास्त्रों का ज्ञान देते हैं और पुण्य-पाप की व्याख्या करते हैं। उन्होंने राजा परीक्षित की कहानी सुनाते हुए बताया कि एक बार राजा परीक्षित शिकार करते हुए जंगल में गए चले गए थे। वहां ऋषि शमीक समाधि में मिले। राजा ने प्यास लगने पर ऋषि से जल मांगा। लेकिन ऋषि ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। गुस्सा होक राजा ने पास पड़ा एक मरा हुआ सांप उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया। जब ऋषि पुत्र शृंगी को पता चला तो उन्होंने राजा को सात दिनों के भीतर तक्षक नाग के डंसने का श्राप दे दिया।
श्राप अवधि के दौरान, राजा परीक्षित ने व्यासपुत्र शुकदेव से श्रीमद्भागवत कथा सुनने का निश्चय किया। शुकदेव ने सात दिनों तक भगवान विष्णु की लीलाओं का वर्णन किया और उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। इस प्रकार गुरु के प्रयास से परीक्षित के अज्ञान का अंधकार दूर हुआ। इस अवसर पर मुख्य यजमान उमा महेश्वर शुक्ल, भाजयुमो जिलाध्यक्ष सर्वेश त्रिपाठी, पूर्व एडीओ एजी राधेश्याम मिश्र, घंटू मिश्र, योगेंद्र मिश्र मौजूद रहे।