धनघटा। महुली थाना क्षेत्र के ग्राम कोदवट में एक कलयुगी बेटे ने संपत्ति के लालच में अपने पिता को केवल मृतक ही नही बनाया। बल्कि गलत वरासत भी तैयार करा लिया। भनक लगते ही तहसीलदार धनघटा योगेंद्र पाण्डेय गांव पहुंचे। ग्रामीणों से जानकारी लिया। वरासत आदेश को रद्द कर दिया। इस बात को लेकर पूरे दिन तहसील मुख्यालय पर चर्चा का विषय रहा।
महुली थाना क्षेत्र के कोदवट गांव निवासी सुखी राम ने संपत्ति के लालच में अपने पिता विश्वनाथ को 17 मार्च 1999 को मृत्यु होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर वरासत का ऑनलाइन आवेदन कर दिया। तहसील कर्मियों ने 19 फरवरी 25 को जांच कर वरासत प्रक्रिया शुरू कर दिया। वरासत के आधार पर मृतक विश्वनाथ को 17 मार्च 1999 में मृत्यु होने की बात दर्शाते हुए उनकी काली जगदीशपुर राजस्व गांव स्थित जमीन का वरासत करने का आदेश भी जारी कर दिया गया।
किसी तरह यह मामला खुल जाने पर तहसीलदार धनघटा योगेंद्र पाण्डेय ने खुद जाकर गांव में पड़ताल किया। पता चला कि विश्वनाथ जीवित हैं। अपने दूसरे पुत्र के साथ टाटानगर में रह रहे हैं। जांच में मृतक के जिंदा रहने की पुष्टि होते ही तहसीलदार ने वरासत रद्द करते हुए मामले की जांच करने का निर्देश दिया। मामले के बारे में जानकारी करने पर तहसीलदार धनघटा ने बताया कि मामला काफी गंभीर है।
प्रशासन की सक्रियता से समय रहते ही जानकारी हो गई। वह मौके पर जाकर सच्चाई का पता किये। वरासत पूरी तरह से गलत मिली। तत्काल प्रभाव से इस आदेश को रद्द कर दिया गया है। मामले की जांच करा कर इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले का भी पता किया जा रहा है कि यह मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ जो भी कर्मचारी गलत मृतक प्रमाण पत्र जारी किया है। उसके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। संवाद