बस्ती जिले की रहने वाली और हाईकोर्ट लखनऊ में एडवोकेट प्रयाग मति गुप्ता का आरोप था कि कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में उनके मामा का घर है।
मामा ने अपनी बेटी की शादी गोरखपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति के यहां तय की थी। 31 नवंबर 2015 को तिलक की रस्म की अदायगी भी लड़के वाले के घर जा कर हुई थी।
तिलक में पांच लाख नकद, बर्तन आदि सामग्री लड़के पक्ष को दिया गया था। 22 फरवरी 2016 को शादी की तिथि तय थी। खलीलाबाद के एक मैरिज हाल में बारात आने की पूरी तैयारी हो चुकी थी।
रिश्तेदार भी जुट गए थे। बारात आने का इंतजार किया जा रहा था। शाम सात बजे के करीब लड़के के पिता, माता और तीन-चार लड़कियों और लड़कों को लेकर उसके घर आए। आरोप था कि लड़के के पिता ने दूल्हे के नहीं आने और शादी से इन्कार कर देने की जानकारी दी।
दूल्हे के नहीं आने और शादी नहीं होने की दशा में बेइज्जती होने से पीड़ित मामा ने लड़के वालों से काफी दुहाई दी, लेकिन लोगों ने एक न सुनी।
इधर, दूल्हे के नहीं आने और शादी नहीं होने से लड़की की सदमे में तबीयत खराब हो गई। आरोप था कि लड़के पक्ष के लोगों ने दहेज में कार या पांच लाख नकद देने पर ही शादी होने की जिद ठान ली।
पीड़ित पिता का आरोप था कि वह काफी गिड़गिड़ाया लेकिन लड़के के पिता नहीं माने और उल्टे पुलिस बुला कर जेल भेजवाने की धमकी दी।
तिलक में चढ़ाई रकम और सामान को वापस करने की मांग भी पूरा करने को तैयार नहीं हुए। पीड़ित ने कोतवाली में तहरीर दी और कार्रवाई की मांग की।
कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि फोन पर लड़के के पिता और लड़के से वार्ता हुई। लड़की के पिता ने भी लड़के से वार्ता की है। लड़के ने बताया कि टेंपो पलटने से वह दुर्घटना में घायल हो गया था।
इसकी वजह से बारात लेकर नहीं जा पाया था। दोनों पक्षों को कोतवाली में बुलाया गया है। यदि जांच में दहेज के लिए बारात लेकर नहीं आने और शादी से इन्कार करने की बात सामने आई तो मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।