संतकबीरनगर। जिले के 13 रिटायर्ड शिक्षकों का जीपीएफ भुगतान अटक गया है। यह शिक्षक इसी साल मार्च में ही रिटायर हुए थे। जिले के शिक्षकों के जीपीएफ का रुपया बस्ती ट्रेजरी में डीआईओएस के यहां डंप पड़ा है। यह भुगतान दोनों जिलों के अधिकारियों की लापरवाही के चलते नहीं हो पा रहा है। शासन ने इस मामले में आपत्ति जताई है। इधर, डीआईओएस ने बस्ती के डीआईओएस को पत्र लिखकर जीपीएफ के डंप पड़े रकम के भुगतान की मांग की है।
बता दें कि वर्ष 1997 में बस्ती का कुछ हिस्सा अलग करके नया जिला संतकबीरनगर बनाया गया। इसमें सिद्धार्थनगर का कुछ क्षेत्र भी शामिल किया गया। इससे पहले माध्यमिक शिक्षकों का वेतन भुगतान, जीपीएफ से संबंधित खाते का संचालन बस्ती और सिद्धार्थनगर से होता था। विभाजन के बाद जीपीएफ की धनराशि संतकबीरनगर के कोषागार में हस्तांतरित हो जानी थी लेकिन गंभीरता से पैरवी न किए जाने के कारण 27 वर्ष बाद भी रकम ट्रांसफर नहीं हो पाई।
विभाजन से पूर्व मौजूदा संतकबीरनगर के 34 सहायता प्राप्त और 11 संस्कृत स्कूलों के 350 शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ की रकम बस्ती में ही जमा होती थी। जीपीएफ मद के करीब 68 करोड़ रुपये बस्ती डीआईओएस कार्यालय के खाते में डंप पड़े हैं। रकम न आने से 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए 13 शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों के जीपीएफ का भुगतान अटक गया है।
इधर, शासन के अनु सचिव रचना जायसवाल ने भी जीपीएफ का भुगतान न होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि बस्ती कोषागार में रकम जमा था तो उसका ब्याज कितना हुआ है, इसकी रिपोर्ट मांगी है। जीपीएफ भुगतान के प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए डीआईओएस ने बस्ती के डीआईओएस को 16 जुलाई को पत्र लिखकर जीपीएफ के डंप पड़े रकम को भेजने की सिफारिश की है।
कोट
बस्ती कोषागार में जीपीएफ का 68 करोड़ डंप पड़ा हुआ है। रकम को वापस मंगाने के लिए डीआईओएस बस्ती को पत्र भेजा गया है। जिससे की सेवानिवृत्त हुए शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों के जीपीएफ का भुगतान किया जा सके।
-हरिशचंद नाथ, डीआईओएस